राजस्थान का धौलपुर जिला आज एक ऐतिहासिक और रणनीतिक सुरक्षा अभ्यास का गवाह बनने जा रहा है। जिले की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने और आपातकालीन स्थितियों के लिए नागरिकों को तैयार करने के उद्देश्य से आज, 24 अप्रैल 2026 को पूरे जिले में ‘ब्लैक आउट ड्रिल’ (Blackout Drill) आयोजित की जाएगी। जिला प्रशासन ने इसे ‘राष्ट्रहित’ में उठाया गया कदम बताया है।
सायरन बजते ही ‘गुल’ हो जाएगी बिजली
जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर श्रीनिधि बी.टी. द्वारा जारी आदेश के अनुसार, आज रात ठीक 8 बजे जिले भर में सायरन की आवाज सुनाई देगी। यह सायरन इस बात का संकेत होगा कि ‘ब्लैक आउट’ शुरू हो चुका है।
समय: रात्रि 8:00 बजे से 8:15 बजे तक (कुल 15 मिनट)।
क्या करना होगा?: नागरिकों से अपील की गई है कि वे स्वेच्छा से अपने घरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लाइटें बंद कर दें।
सख्त हिदायत: ड्रिल के दौरान मोबाइल टॉर्च, मोमबत्ती या अन्य किसी भी प्रकाश उत्पन्न करने वाले उपकरण का उपयोग न करने का आग्रह किया गया है।
क्यों जरूरी है ‘ब्लैक आउट’?
Black out – File Pic
आधुनिक दौर में ‘ब्लैक आउट’ का अभ्यास अक्सर सीमावर्ती क्षेत्रों या उन संवेदनशील जिलों में किया जाता है जहाँ आंतरिक सुरक्षा को लेकर अलर्ट रहता है। इसके तीन मुख्य उद्देश्य हैं:
आपातकालीन तैयारी: यदि भविष्य में कभी युद्ध या हवाई हमले जैसी स्थिति बनती है, तो नागरिकों को अंधेरे में सुरक्षित रहने का अनुभव रहे।
सुरक्षा ऑडिट: बिजली बंद होने के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली कैसी रहती है, इसका परीक्षण करना।
जन-जागरूकता: लोगों को यह समझाना कि सुरक्षा केवल वर्दीधारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है।
अफवाहों से बचें: प्रशासन की विशेष अपील
कलेक्टर ने आमजन से विशेष अपील की है कि 15 मिनट के इस अंधेरे के दौरान घबराएं नहीं और किसी भी प्रकार की नकारात्मक अफवाहों पर ध्यान न दें। यह केवल एक ‘मॉक ड्रिल’ है जो सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए की जा रही है। नागरिकों से अपेक्षा की गई है कि वे एक जागरूक प्रहरी की भांति प्रशासन का सहयोग करें ताकि यह ड्रिल सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
धौलपुर पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर
इस 15 मिनट की अवधि के दौरान पूरे जिले में पुलिस गश्त बढ़ा दी जाएगी। आपातकालीन सेवाओं (अस्पताल, दमकल आदि) को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में पूर्ण अंधकार सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। धौलपुर के इतिहास में इस तरह का संगठित ‘स्वैच्छिक ब्लैक आउट’ पहली बार देखा जा रहा है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है।