‘BJP ने भैरोंसिंह शेखावत का कभी सम्मान नहीं किया’, जानें ऐसा क्यों बोले अशोक गहलोत?

राजस्थान की राजनीति के पितामह कहे जाने वाले भैरोंसिंह शेखावत को आज उनकी पुण्यतिथि ( Bhairon Singh Shekhawat Death 15 मई ) पर याद किया जा रहा है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बेहद भावुक और आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए सीधे भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गहलोत का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश की राजनीति में ‘बाबोसा’ की विरासत को लेकर अक्सर खींचतान देखने को मिलती है।

भाजपा ने नहीं, कांग्रेस ने दिया सम्मान

अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए भाजपा को घेरा। उन्होंने लिखा कि जब भैरोंसिंह शेखावत देश के उपराष्ट्रपति बने थे, तब राजस्थान में भाजपा ने उनके सम्मान में कोई बड़ा कार्यक्रम तक नहीं रखा था।

गहलोत ने याद दिलाया कि उस समय उनकी कांग्रेस सरकार ने मुख्यमंत्री आवास में शेखावत जी के सम्मान में एक भव्य समारोह आयोजित किया था।

गहलोत के अनुसार, भाजपा ने अपने ही दिग्गज नेता को दरकिनार किया, जबकि कांग्रेस ने हमेशा उनके कद का सम्मान किया।

पूर्व उपराष्ट्रपति श्री भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे। पूरा राजस्थान जानता है कि उनके जीवनकाल में भाजपा ने उन्हें कभी पूरा सम्मान नहीं दिया। जब वे उपराष्ट्रपति बने तो उनके सम्मान में हमारी कांग्रेस सरकार ने मुख्यमंत्री आवास में उनके सम्मान में भव्य…

— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) May 14, 2026

‘अंतिम संस्कार की अनुमति तक नहीं देते’

गहलोत ने शेखावत के निधन के बाद के घटनाक्रम को याद करते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शेखावत जी के निधन के दिन ही कांग्रेस सरकार ने उनके परिजनों से चर्चा कर विद्याधर नगर स्टेडियम में उनके दाह संस्कार के लिए जमीन आवंटित की थी।

उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में आज भी यह चर्चा है कि यदि उस समय भाजपा सरकार होती, तो वे विद्याधर नगर में अंतिम संस्कार की अनुमति तक नहीं देते और न ही वहां स्मारक बनने देते।

बाबोसा और गहलोत के बीच के ‘निजी रिश्ते’

देश के पूर्व उप राष्ट्रपति, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।

स्व.शेखावत जी मुझसे बहुत स्नेह रखते थे, जब मैं प्रथम बार मुख्यमंत्री बना तो श्री शेखावत नेता प्रतिपक्ष थे, अलग अलग राजनीतिक विचारधारा होने के बावजूद हमारे… pic.twitter.com/ocRjiDXQty

— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) May 15, 2026

अशोक गहलोत अक्सर भैरोंसिंह शेखावत के साथ अपने मधुर संबंधों का जिक्र करते रहे हैं। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने एक बार फिर यह साबित करने की कोशिश की है कि विचारधारा अलग होने के बावजूद कांग्रेस ने शेखावत जी को एक ‘स्टेट्समैन’ के रूप में देखा, जबकि उनकी अपनी पार्टी ने उन्हें सम्मान देने में कंजूसी बरती।

बीजेपी खेमे में खलबली, जवाब की तैयारी

गहलोत के इस पोस्ट के बाद राजस्थान भाजपा में हड़कंप मच गया है। भाजपा के कई दिग्गज नेता अब गहलोत के दावों को ‘गुमराह करने वाला’ बता रहे हैं। हालांकि, गहलोत ने साक्ष्यों और पुराने वाक्यों के जरिए अपनी बात को जनता के बीच रख दिया है, जिससे यह मुद्दा सियासी गर्माहट ला रहा है। 

BJP को चुनौती

भाजपा हमेशा खुद को शेखावत जी की विरासत का असली हकदार बताती है, लेकिन गहलोत ने ‘स्मारक’ और ‘सम्मान समारोह’ का मुद्दा उठाकर इस नैरेटिव को चुनौती दी है। नई पीढ़ी के मतदाताओं को गहलोत यह बताना चाह रहे हैं कि कांग्रेस रिश्तों और मर्यादा की राजनीति करती है।

राजस्थान की मर्यादापूर्ण राजनीति में ‘बाबोसा’ का नाम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। अशोक गहलोत का यह पोस्ट केवल एक श्रद्धांजलि नहीं है, बल्कि भाजपा के गढ़ में घुसकर उसकी नीति पर किया गया सीधा प्रहार है।