जोधपुर: उपभोक्ताओं को कम पेट्रोल-डीजल देने की शिकायतों के बीच जयपुर से आई विधिक माप विज्ञान विभाग की टीम ने गुरुवार को दूसरे दिन भी जोधपुर में औचक जांच अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान तीन पेट्रोल पंपों पर गंभीर गड़बड़ी पकड़ी गई। जहां पांच लीटर ईंधन पर करीब 30 मिलीलीटर तक कम आपूर्ति हो रही थी। टीम ने तीनों पंपों के नोजल सीज कर दिए।
विभागीय जांच में एनआर फिलिंग स्टेशन के एक नोजल से हर पांच लीटर पर 30 मिलीलीटर कम पेट्रोल मिला। विभाग के अनुसार, प्रतिदिन करीब 300 लीटर बिक्री के आधार पर हर महीने लगभग 60 लीटर पेट्रोल की कम आपूर्ति की जा रही थी।
इसी तरह केके ट्रेवल्स पेट्रोल पंप पर करीब 45 लीटर मासिक और सुप्रीम मोटर्स पर लगभग 120 लीटर मासिक पेट्रोल कम देने का मामला सामने आया। सुप्रीम मोटर्स में प्रतिदिन करीब 700 लीटर बिक्री के आधार पर सबसे अधिक गड़बड़ी पकड़ी गई।
जांच दल ने श्याम एनर्जी स्टेशन और रिलायंस जियो-बीपी मोबिलिटी पर भी निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान विभाग ने 3 हजार रुपए का जुर्माना भी वसूला। उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सुमित गोदारा के निर्देश पर चल रहे इस अभियान में विभाग ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी करने वाले पेट्रोल पंपों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल
शुक्रवार सुबह आम जनता के लिए महंगाई का बड़ा झटका लेकर आई। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के कारण प्रदेश में तेल की कीमतों में 3.16 से 4.00 प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राजधानी जयपुर में पेट्रोल 108.19 और डीजल 93.43 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। जबकि श्रीगंगानगर और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती जिलों में कीमतें 110 के करीब पहुंच रही हैं।
बिक्री पर ‘सीलिंग’ और डीलर्स का विरोध
बढ़ती कीमतों के बीच, तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर ‘सीलिंग’ लागू कर दी है। अब पंपों पर अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल देने की सीमा तय की गई है। साथ ही, सुरक्षा कारणों से बोतलों, ड्रमों या डिब्बों में ‘लूज’ तेल बेचने पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है। अब केवल वाहनों की टंकी की क्षमता के अनुसार ही ईंधन दिया जा रहा है।
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन का पक्ष
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने इसे तेल कंपनियों का ‘मनमाना फैसला’ बताया है। डीलर्स का तर्क है कि बिना लिखित आदेश के इन पाबंदियों से ग्राहकों के साथ विवाद बढ़ेगा। डिपो से कम सप्लाई मिलने के कारण कई पंप ‘ड्राई’ हो रहे हैं, जिससे ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत डीलर्स पर कानूनी कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है।