धौलपुर. एमपी के कूनो नेशनल पार्क से आए चीता (केजीपी-3) ने एक दफा फिर से पूर्वी राजस्थान के धौलपुर जिले को सुर्खियों में ला दिया। वहीं, चीता के धौलपुर के सरमथुरा उपखंड में डेरा डालने से धौलपुर की भूगौलिग स्थिति को वन्यजीवों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जा रहा है। वहीं, प्रदेश का पांचां बाघ अभयारण्य धौलपुर-करौली टाइगर सेंचुरी के लिए यह शुभ संकेत हैं। टाइगर सेंचुरी करीब 599.64 वर्ग किलोमीटर इलाके में फैली है और आने वाले दिनों में यह दिल्ली-एनसीआर और यूपी के आगरा मंडल के पर्यटकों के लिए खासी सुविधाजनक सेंचुरी साबित होगी। अभी तक एनसीआर के लोग अलवर की सरिस्का या फिर भी सवाईमाधोपुर जिले की रणथम्भौर टाइगर सेंचुरी को भ्रमण के लिए पसंदीदा स्थान है। लेकिन धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र और भूल-भुलाइया की दिखने वाले बीहड़ इस क्षेत्र में पर्यटन को खासा बढ़ावा देंगे। गौरतलब रहे कि प्रदेश की इस सेंचुरी के बफर जोन में करीब 108 गांव शामिल हैं। जिसमें धौलपुर जिले में 60 और पड़ोसी जिले करौली में 48 गांव हैं। टाइगर रिजर्व लगभग 1075 वर्ग किलोमीटर में है। जिसमें 599 किमी कोर और 457 किमी बफर जोन आता है। धौलपुर जिले में सेंचुरी इलाके में वर्तमान में शावक समेत 6 टाइगर की उपस्थिति है।
चौकी, टे्रक रूट और ग्रास लैंड पर होगा काम
धौलपुर-करौली टाइगर सेंचुरी में अब चौकी स्थापित करने, ट्रेक रूट और ग्रास लैंड को लेकर जल्द कार्य शुरू होगा। इसमें ट्रेक रूट विशेष है, जिससे पर्यटक यहां सेंचुरी सफारी कर सकेंगे। ट्रेक बनने से पर्यटकों की जिप्सी व केन्ट्रा गाडिय़ां आसानी से आ-जा सकेगी। यह इसलिए विशेष है कि यह ट्रेक रूट उस इलाके से होकर निकलने जहां पर इन दिनों टाइगर की उपस्थिति है। जिससे पर्यटक टाइगरों के नजारे आसानी से कर पाएंगे। साथ ही अंदर सेंचुरी में वन्यजीव की सुरक्षा के लिए चौकियां स्थापित होंगी, जिससे अनचाही और संदिग्ध गतिविधियों को रोका जा सकेगा। वहीं, सेंचुरी में ग्रास लैंड बढ़ाने के लिए सरकार ने बजट आवंटन की घोषणा की है। यह राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता विकास परियोजना के अंतर्गत धौलपुर और करौली जिलों में वनीकरण और विकास कार्यों के लिए भी बजट खर्च होगा।
धौलपुर से सरमथुरा तक होटल इण्डस्ट्रीज को मिलेगा बढ़ावा
धौलपुर टाइगर सेंचुरी को विधिवत शुरू होने करीब डेढ़ से दो साल और लग सकते हैं। माना जा रहा है सेंचुरी में पर्यटकों की गतिविधि शुरू होने पर आने वाले समय में जिले में होटल इण्डस्ट्रीज को पंख लग सकते हैं। इसमें धौलपुर मुख्यालय के अलावा बाड़ी और सरमथुरा क्षेत्र में नए होटल खुल सकते हैं और बड़े गु्रप भी यहां निवेश कर सकते हैं। उधर, पर्यटकों को भ्रमण कराने के लिए वाहन, नेचर गाइड और अन्य लोगों को भी रोजगार मिल सकेगा। अभी धौलपुर आने वाले पर्यटक केवल मचकुंड तीर्थस्थल और चंबल सफारी तक ही सीमित हैं। लेकिन उनका स्टे नहीं होता है और वह कुछ घंटे बाद यहां से आगरा, ग्वालियर या फिर जयपुर निकल जाते हैं।
जिले की 5 सेंचुरी से खींचेंगी पर्यटक
जिले के पुराने अभयारण्य में रामसागर वन्यजीव अभयारण्य है। यह मुख्यतय रामसागर झील के लिए विख्यात है। यहां बड़ी संख्या में जलीय जीव और प्रवासी पक्षी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। इसी तरह जिले के बाड़ी उपखंड में वन विहार वन्यजीव अभयारण्य है। सन् 1955 में स्थापित यह अभयारण्य 26.6 वर्ग किलोमीटर तक फैला है और विंध्य पठार पर स्थित है। वहीं, केसरबाग वन्यजीव अभयारण्य का जंगल बारिश के दौरान देखने लायक होता है। यह करीब 14.76 वर्ग किमी में फैला संरक्षित क्षेत्र है। इसी सेंचुरी में राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल है। इस इलाके में भी वन्यजीवों की खूब आवाजाही है। इसके अलाव राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य और धौलपुर-करौली टाइगर सेंचुरी भी शामिल है। ऐसे कम ही इलाके होते हैं, जहां पर एक साथ पांच सेंचुरी मौजूद हों।
– डीकेटीआर समेत पांच सेंचुरी धौलपुर को खास बनाती हैं। आने वाले समय में धौलपुर वाइल्ड लाइफ पर्यटन के क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकता है। यहां भूगौलिक स्थिति इसको खास बनाती है। धौलपुर-करौली टाइगर सेंचुरी शुरू होने पर क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा और क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के नए साधन खुलेंगे।
– चेतन वी.कुमार, डीएफओ धौलपुर