dholpur: 16 कैमरों की निगरानी में बनेगा ड्राइविंग लाइसेंस

धौलपुर. जिला परिवहन एवं सडक़ सुरक्षा विभाग में अब ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया पूरी तरह हाइटेक होने जा रही है। महानगरों की तर्ज पर धौलपुर में भी ऑटोमेटिक सेंसर ट्रैक स्थापित कर दिया गया है। सोमवार से नए आवेदकों की ड्राइविंग ट्रायल इसी ऑटोमेटिक ट्रैक के माध्यम से होगी। यानी अब पहले की तरह लाइइेंस नहीं बन पाएगा। अगर कहे तो अब पहले जैसा आसान नहीं होगा। अगर फेल होते हैं तो वापस कड़े नियमों से गुजरना होगा।

जिला परिवहन एवं सडक़ सुरक्षा अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और मानवीय हस्तक्षेप को समाप्त करना है। अब किसी प्रकार के एजेंट की आवश्यकता नहीं रहेगी तथा केवल कुशल वाहन चालक ही ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग और मारुति के बीच हुए एमओयू के बाद निपुण इंडिया कंपनी की ओर से पूरे ट्रैक का संचालन एवं सत्यापन किया जाएगा। आवेदक ऑनलाइन आवेदन कर स्लॉट बुक कर अपना समय एवं तिथि निर्धारित कर सकेंगे। इसके बाद दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।

दिखाई जाएगी की १२ मिनट की वीडियो क्लिप

ट्रायल प्रक्रिया से पहले आवेदकों को आरएफआईडी कार्ड के माध्यम से लगभग 12 मिनट की वीडियो क्लिप दिखाई जाएगी। जिसमें टेस्टिंग ट्रैकए यातायात संकेत, सडक़ सुरक्षा एवं ट्रायल प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी दी जाएगी। इसके बाद आवेदक का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगाए जो ट्रायल के दौरान तीन बार होगा।

ट्रैक पर पहुंचने के बाद बैरियर पर लगी लाल लाइट स्वत: हरी हो जाएगी और आवेदक को विभिन्न परीक्षणों से गुजरना होगा। इनमें पार्किंग टेस्ट, 8 नंबर ट्रैक, एच ट्रैक, ग्रेडियंट टेस्टए स्लोप और रेड लाइट टेस्ट प्रमुख होंगे।

पूरी ट्रायल प्रक्रिया ऑटोमेटिक सेंसर एवं जियो फेंसिंग तकनीक के माध्यम से 16 कैमरों की निगरानी में संचालित होगी। ट्रायल समाप्त होते ही परिणाम स्वत: जनरेट हो जाएगा।

यातायात नियमों की होगी जानकारी

जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि केवल वही चालक लाइसेंस प्राप्त कर सकेगा जिसे वाहन संचालन, यातायात नियमों और सडक़ सुरक्षा की पूर्ण जानकारी होगी। विभाग की भूमिका केवल दस्तावेज सत्यापन तक सीमित रहेगी। नई व्यवस्था से सडक़ सुरक्षा को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।