जोधपुर। ट्रेनों में सफर के दौरान लोअर और मिडिल बर्थ को लेकर यात्रियों के बीच होने वाले विवादों पर अब रेलवे ने सख्ती दिखाई है। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि किस बर्थ का उपयोग कब और कैसे किया जा सकता है। नियमों के अनुसार दिन के समय मिडिल बर्थ खुली नहीं रखी जा सकती। रेलवे की इस एडवाइजरी का उद्देश्य यात्रियों के बीच विवाद कम करना और वरिष्ठ नागरिकों व दिव्यांग यात्रियों की यात्रा को अधिक आरामदायक बनाना है।
जोधपुर रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव ने बताया कि कई बार यात्रियों के बीच मिडिल बर्थ को लेकर बहस की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में टीटीई को रेलवे के नियम लागू कराने का अधिकार दिया गया है। यात्रियों का कहना है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में कई बार दिन के समय भी मिडिल बर्थ खुली रहती है, जिससे अन्य यात्रियों को बैठने में परेशानी होती है।
सुबह 6 बजे के बाद मिडिल बर्थ को बंद रखना जरूरी
खासकर वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को लोअर बर्थ पर बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। जानकारी के अभाव में कई बार यात्री नियमों को लेकर आपस में बहस करने लगते हैं। इसी को देखते हुए रेलवे ने दोबारा स्पष्ट एडवाइजरी जारी की है। रेलवे बोर्ड की ओर से वर्ष 2017 में जारी परिपत्र के अनुसार आरक्षित कोचों में मिडिल बर्थ केवल रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही खोली जा सकती है। सुबह 6 बजे के बाद मिडिल बर्थ को बंद रखना जरूरी है, ताकि लोअर बर्थ पर बैठे यात्री आराम से बैठ सकें।
यह एडवाइजरी
लोअर बर्थ: दिन के समय सीट साझा करनी होगी, ताकि अन्य सहयात्री भी बैठ सकें।
मिडिल बर्थ: दिन में मिडिल बर्थ को फोल्ड रखना जरूरी है। इसका उपयोग केवल रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सोने के लिए किया जा सकता है।
अपर बर्थ: इस बर्थ का उपयोग यात्री पूरे समय आराम और सोने के लिए कर सकता है।
साइड लोअर बर्थ: दिन के सफर में यह सीट साझा करनी पड़ सकती है, खासकर यदि आरएसी यात्री सीट शेयर कर रहा हो। रात में केवल उसी यात्री का अधिकार रहेगा जिसके नाम पर टिकट आरक्षित है।
साइड अपर बर्थ: दिन में यात्री नीचे साइड लोअर सीट पर बैठ सकता है, लेकिन रात में उसे अपनी साइड अपर बर्थ पर जाना होगा। नीचे की सीट पर उसका अधिकार नहीं रहेगा।