जयपुर। जिस तरह खाद्य पदार्थों पर रेड और ग्रीन डॉट का निशान होता है, उसी तरह ब्यूटी और स्किन केयर प्रोडक्ट्स पर भी स्पष्ट मार्किंग होनी चाहिए। जिन प्रोडक्ट्स में पशु का उपयोग और हानिकारक केमिकल्स हों, उन्हें रेड मार्क और वीगन व सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स को ग्रीन मार्क दिया जाना चाहिए। यह कहना है एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट श्रेया गोदावत का। वे रविवार को मानसरोवर स्थित सुबोध लॉ कॉलेज में ‘ग्लो विदआउट गिल्ट’ विषय पर आयोजित टॉक शो में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रही थीं।
कार्यक्रम जैन रत्न युवती मंडल जयपुर की ओर से ‘एनिमल हमारे उपयोग के लिए नहीं, बल्कि हमारे साथ रहने के लिए हैं’ के संदेश के साथ हुआ। कार्यक्रम अध्यक्ष विजेता और महासचिव श्वेता ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य पशु क्रूरता के खिलाफ जागरूकता फैलाना और लोगों को वीगन व अहिंसा आधारित प्रोडक्ट्स के उपयोग के लिए प्रेरित करना रहा।
इस दौरान ऑर्गेनिक और सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जहां पर्यावरण और पशु हितैषी उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में एंटरप्रेन्योर अमित जैन ने कहा कि कई स्टार्टअप ऐसे हैं, जो सस्टेनेबिलिटी पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। वहीं, कई प्रोडक्ट सस्टेनेबल एनवायरमेंट को प्रमोट कर रहे हैं।
मूल्यों और विचारों से हैं इंसान की असली पहचान
श्रेया गोदावत ने कहा कि कई लिपस्टिक, नेल पॉलिश और हेयर प्रोडक्ट्स में पशु-आधारित सामग्री का उपयोग होता है, लेकिन लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती। सरकार और कंपनियों को इस दिशा में जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ताकि उपभोक्ता जागरूक होकर सही चुनाव कर सकें। उन्होंने कहा कि आज युवा सोशल मीडिया पर ब्रांड्स और लग्जरी दिखाने को सफलता मानते हैं, जबकि इंसान की असली पहचान उसके मूल्यों और विचारों से होती है।
दोस्त ने बदली सोच
श्रेया ने बताया कि वह जैन परिवार से होने के बावजूद पहले लेदर और अन्य पशु आधारित उत्पादों का इस्तेमाल करती थीं। सिंगापुर में पढ़ाई के दौरान एक दोस्त के सवाल ‘जब आप मांस नहीं खातीं, तो उसे पहनना कैसे सही है?’ ने उनकी सोच बदली। इसके बाद वीगन लाइफस्टाइल अपनाई। पिछले 11 वर्षों से उन्होंने न सिल्क के कपड़े खरीदे और न ही लेदर बैग खरीदा। उन्होंने कहा कि मेकअप छोडऩे की जरूरत नहीं, बल्कि क्रुएल्टी-फ्री और वीगन उत्पाद चुनने की आवश्यकता है।