जयपुर। हाईकोर्ट ने जयपुर में 18 साल पहले सीरियल बम धमाकों के दौरान जिंदा बम मिलने के मामले में दो आतंकियों को फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। इस मामले में मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद ने आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देते हुए सुनवाई होने तक सजा पर स्थगन की मांग की थी।
न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह व न्यायाधीश भुवन गोयल की खंडपीठ ने मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद के स्थगन प्रार्थना पत्र को शुक्रवार को खारिज कर दिया। अपील में कहा गया था कि 13 मई 2008 को जयपुर में 8 सीरियल ब्लास्ट हुए थे और 9वां बम चांदपोल बाजार के गेस्ट हाउस के पास जिंदा मिला था। बम फटने के 15 मिनट पहले इसे डिफ्यूज कर दिया गया था।
हाईकोर्ट ने रद्द की थी फांसी की सजा
इस मामले में जयपुर बम ब्लास्ट मामलों की विशेष अदालत ने 4 अप्रैल 2025 को मोहम्मद सरवर आजमी, शाहबाज अहमद, सैफुर्रहमान और मोहम्मद सैफ को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अपीलार्थियों की ओर से कहा गया कि ब्लास्ट के 8 मामलों में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने सजा रद्द कर बरी कर दिया।
इस आधार पर मांगी थी जमानत
जिंदा बम मामले में भी वही सबूत और तथ्य अभियोजन की ओर से पेश किए गए हैं। जब समान मामलों में बरी किया जा चुका है, तो ट्रायल कोर्ट उन्हीं तथ्यों के आधार पर सजा कैसे दे सकता है? अपीलार्थियों की ओर से कहा गया कि वे लंबे समय से जेल में हैं और सुनवाई में लंबा समय लगेगा। ऐसे में जमानत का लाभ दिया जाए।
सरकार ने पेश किए अतिरिक्त साक्ष्य
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने कहा कि आतंकियों का मुख्य काम आतंक फैलाना होता है। इन लोगों ने न्यूज चैनल को मेल करके ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली थी। इस केस में उस मेल को रिकवर करने के साथ ही अतिरिक्त साक्ष्य पेश किए गए हैं, जिनके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामला गंभीर है। विस्फोट के कारण 71 लोगों की मौत हो गई और 185 लोग घायल हो गए थे। ऐसे में राहत देना उचित नहीं होगा।