Rajasthan University Fraud: राजस्थान यूनिवर्सिटी के कुछ कथित कर्मचारी यूनिवर्सिटी की साख को ही बट्टा लगाने में पीछे नहीं हैं। ऐसे ही एक ताजा मामले में एक दुस्साहसी कर्मचारी ने बैंक लोन लिया और यूनिवर्सिटी की कुलगुरु को ही लोन का गारंटर बना डाला। मामला तब खुला जब बैंक को लोन की किस्त वक्त पर नहीं मिली। बैंक ने जब कुलगुरु कार्यालय फोन कर इस बारे में जानकारी दी, तो आनन फानन में कुलगुरु ने कथित कर्मचारी के निलंबन आदेश जारी कर दिए।
यह है पूरा मामला
यूनिवर्सिटी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक समाज शास्त्र विभाग में कार्यरत सहायक अनुभाग अधिकारी सिंह ने निजी जरूरत के लिए बैंक से लोन लिया था। लोन मिल गया और किस्त चुकाने का सिलसिला शुरू हो गया। लेकिन बीते कुछ महीनों से धर्मसिंह ने बैंक लोन की किस्त जमा नहीं कराई। बीते गुरूवार को बैंक प्रबंधन ने राजस्थान यूनिवर्सिटी कुलगुरू कार्यालय फोन किया और बताया कि उक्त कर्मचारी के बैंक लोन दस्तावेज में कुलगुरु गारंटर हैं और संबंधित कर्मचारी की बैंक लोन किस्त बीते लंबे समय से बकाया चल रही हैं। इसकी जानकारी कुलगुरु तक पहुंची तो संबंधित कर्मचारी को फौरन कार्यालय में तलब किया लेकिन कर्मचारी नहीं पहुंचा।
जवाब नहीं दिया तो सस्पेंड
राजस्थान यूनिवर्सिटी कुलगुरू प्रो अल्पना कटेजा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से सहायक अनुभाग अधिकारी धर्मसिंह के निलंबन आदेश जारी कर दिए। बताया जा रहा है कि उक्त कर्मचारी बीते लंबे समय से कार्यालय मनमर्जी से आता रहा है। जिसके कारण कार्यालय का कामकाज भी प्रभावित होता रहा है। इस बारे में उक्त कर्मचारी की कई बार शिकायत उच्च स्तर पर हुई लेकिन कर्मचारी संगठनों से जुड़ी राजनीति के चलते मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन अब उक्त कर्मचारी के खिलाफ फर्जी गारंटर मामले पुलिस थाने में केस दर्ज कराने की कार्रवाई करेगा।
निलंबन आदेश जारी होते ही हड़कंप
शुक्रवार दोपहर बाद कुलगुरु कार्यालय से जैसे ही सहायक अनुभाग अधिकारी धर्मसिंह के निलंबन आदेश जारी हुए तो यूनिवर्सिटी कैंपस में कार्यरत कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि ऐसे ही कुछ और मामले सामने आने की आशंका है। जिनमें फर्जी गारंटर और यूनिवर्सिटी की मुहर का दुरुपयोग कर बैंकों को लाखों का चूना लगाया गया।
पूर्व भी कई मामले फाइलों में दफन
जानकारी के अनुसार पूर्व में भी यूनिवर्सिटी के कई कर्मचारियों ने फर्जी सील लगाकर बैंक लोन लिया और सेवानिवृत भी हो गए। यूनिवर्सिटी के संज्ञान में मामले तब आए जब संबंधित कर्मचारियों ने बैंक लोन की किस्त नहीं चुकाई। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह कहकर मामलों से पल्ला झाड़ लिया कि कर्मचारी सेवानिवृत हो गए हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन इस बारे में जानकारी देने से कतरा रहा है।