नाथद्वारा-देवगढ़ ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट पर 225 करोड़ खर्च, भीम उपखंड अब भी रेलवे मानचित्र से दूर

Bhim Rail Connectivity Demand: राजसमंद जिले का भीम उपखंड आज भी उस रेल सीटी का इंतजार कर रहा है, जिसकी गूंज देश के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुकी है। एक ओर देवगढ़ तो दूसरी ओर ब्यावर से रेल लाइनें बरसों पहले गुजर चुकी हैं, लेकिन इनके बीच बसे भीम को अब तक रेल सुविधा नसीब नहीं हो सकी। 21वीं सदी में भी भीम से महज 40 किलोमीटर दूर रेल पटरी मौजूद है, फिर भी क्षेत्रवासी आजादी के 75 साल बाद तक इंतजार करने को मजबूर हैं। भीम, जिले का सबसे बड़ा उपखंड मुख्यालय होने के बावजूद आज भी केवल सड़क मार्ग पर निर्भर है।

उपखंड से 40 किमी दूर रेलवे लाइन

सरकारें मगरा क्षेत्र के विकास के दावे करती रही हैं, योजनाएं भी बनीं, लेकिन रेल कनेक्टिविटी जैसी मूलभूत सुविधा पर अब तक ठोस पहल नहीं हो सकी। नगर से करीब 40 किलोमीटर दूर देवगढ़ तक रेलवे लाइन पहले से मौजूद है, जिसे अब ब्रॉडगेज में बदला जा रहा है। दूसरी ओर लगभग 70 किलोमीटर दूर ब्यावर से ब्रॉडगेज रेल लाइन गुजरती है। ऐसे में भीम को इन दोनों में से किसी एक रेल मार्ग से जोड़ना न तो अत्यधिक खर्चीला माना जा रहा है और न ही तकनीकी रूप से कठिन। यदि देवगढ़ से भीम होते हुए ब्यावर या हरिपुर तक रेल लाइन बिछा दी जाए, तो यह केवल भीम को ही नहीं बल्कि मेवाड़ और मारवाड़ को भी सीधे जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर बन सकता है।

नाथद्वारा-देवगढ़ तक चल रहा ब्रॉडगेज का काम

रेलवे ने वर्ष 2024-25 में नाथद्वारा से देवगढ़ तक रेलवे लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने के लिए 225 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया था। परियोजना पर तेजी से काम जारी है और दिसंबर 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूरा होने पर मावली से देवगढ़ मदारिया तक लगभग 99 किलोमीटर क्षेत्र रेल संपर्क से जुड़ जाएगा। लेकिन भीम को इससे जोड़ने की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी है।

मेवाड़-मारवाड़ को जोड़ने वाला अहम लिंक

मावली-मारवाड़ मीटरगेज रेल मार्ग को ब्रॉडगेज में बदले जाने का कार्य जारी है। नाथद्वारा से देवगढ़ तक रेलवे लाइन के आमान परिवर्तन का काम प्रस्तावित है, लेकिन इसके आगे की दिशा अब तक तय नहीं हो सकी है। जबकि देवगढ़ से भीम होकर ब्यावर या हरिपुर तक रेल लाइन जुड़ जाए तो यह मार्ग अजमेर से मारवाड़ की ब्रॉडगेज लाइन से सीधे कनेक्ट हो जाएगा।

इससे उदयपुर, राजसमंद, पाली, जोधपुर और आगे बीकानेर तक रेल संपर्क आसान हो सकेगा। साथ ही नागौर, सीकर और झुंझुनूं क्षेत्र के लोगों को भी बेहतर रेल सुविधा मिल सकती है। मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों से लेकर मारवाड़ के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक आवागमन और सुगम हो जाएगा। नवलखा पार्श्वनाथ, चारभुजा मंदिर सहित कई आस्था केंद्रों तक पहुंच आसान होने से धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिल सकती है।

उद्योग और व्यापार को भी मिल सकता है बड़ा बूस्ट

रेल कनेक्टिविटी का लाभ केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। राजसमंद और किशनगढ़ के मार्बल उद्योग, जोधपुरी स्टोन, कांकरोली के टायर उद्योग, पाली के कपड़ा और मेहंदी उद्योग के लिए भी यह रेल मार्ग नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। पाली-उदयपुर के बीच घाट सेक्शन होने से वर्तमान सड़क परिवहन में समय और लागत दोनों अधिक लगते हैं। रेल लाइन बनने से माल परिवहन तेज, सस्ता और सुविधाजनक हो सकेगा। वहीं जैसलमेर, जोधपुर और उदयपुर के बीच पर्यटन गतिविधियों को भी सीधी रेल सुविधा का लाभ मिलेगा।

लोगों की जुबानी, रेल क्यों जरूरी

इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायी शौकत मोहम्मद कहते हैं कि पिछले 75 वर्षों में रेलवे लाइन के अभाव में भीम का वह विकास नहीं हो पाया, जिसकी उम्मीद थी। उनका मानना है कि रेल लाइन बनने से राजसमंद का मार्बल ब्यावर-अजमेर होते हुए किशनगढ़ तक आसानी से पहुंच सकेगा।

व्यवसायी बाबूलाल टांक बताते हैं कि भीम और देवगढ़ मेवाड़-मारवाड़ के बीच स्थित हैं। यहां के लोग मुंबई, सूरत, बैंगलुरु, गुजरात और जोधपुर जैसे शहरों में व्यापार के लिए यात्रा करते हैं, लेकिन ट्रेन पकड़ने के लिए ब्यावर या मारवाड़ जंक्शन जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।

व्यापार संघ अध्यक्ष बाबूलाल कोठारी के अनुसार पिछले करीब 15 वर्षों से भीम को रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग उठ रही है। उनका कहना है कि देवगढ़ मदारिया से भीम होकर हरिपुर तक रेल लाइन बनने से यह क्षेत्र सीधे मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ देगा और विकास को नए पंख मिलेंगे।

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता राजू वैष्णव का कहना है कि रेल यात्रा आमजन के लिए सस्ती, आरामदायक और सुविधाजनक होती है। रेल सुविधा मिलने से यात्रियों के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा और माल परिवहन आसान होगा।