Soyabean Mandi Bhav: सोयाबीन के भाव में एक बार फिर से तेजी लौटती दिखाई दे रही है। नगर की अ श्रेणी कृषि उपज मंडी में इन दिनों दाम लगातार बढ़ रहे हैं। बीते एक माह में सोयाबीन का भाव 6 हजार 200 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 7 हजार 250 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। शुक्रवार को भी मंडी में करीब 1 हजार 50 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की। लगातार बढ़ते भावों से किसानों को कुछ राहत जरूर मिली है।
किसान गोविंद सिंह ने बताया कि पिछले दो वर्षों से सोयाबीन के दाम लागत से भी नीचे बने हुए थे। इस बार लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी तैयार फसल को भी नुकसान पहुंचा जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई। गिरते दामों के कारण किसानों पर आर्थिक दबाव लगातार बना हुआ था। ऐसे में अब भाव में आई तेजी से किसानों को थोड़ी उम्मीद जगी है।
व्यापारी राजकुमार गुप्ता और अंकुश गुप्ता ने बताया कि पिछले दो वर्षों से सोयाबीन का भाव 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर नहीं जा पा रहा था, लेकिन करीब पंद्रह दिनों से बाजार में लगातार तेजी बनी हुई है। व्यापारियों के अनुसार बढ़ती मांग और सीमित आवक के चलते दामों में यह उछाल आया है। इस बार उत्पादन भी कम रहा है। जिससे बाजार में माल की उपलब्धता घट गई है।
मंडी सूत्रों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में सोयाबीन के भाव में और मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि किसानों का कहना है कि भाव बढ़ना सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन उत्पादन कम होने के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कृषि उपज मंडी व्यापारी गोविंद मेड़तवाल ने बताया कि करीब पांच वर्ष पूर्व मंडी में सोयाबीन 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड भाव तक बिकी थी। उन्होंने बताया कि अब पांच साल बाद अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ईरान-इराक तथा अमेरिका के बीच युद्ध जैसे हालातों के कारण एक्सपोर्ट में डीओसी की मांग बढ़ी है। इसी वजह से पिछले तीन माह में सोयाबीन के दाम 5 हजार से बढ़कर 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल के स्तर तक पहुंच गए हैं।
मंडी में बोरियां हुई खत्म, गेहूं तुलाई तीन दिन से ठप
झालावाड़ जिले की बकानी कृषि उपज मंडी में बोरियां खत्म होने से गेहूं की तुलाई पिछले तीन दिन से रुकी हुई है। जयपुर से किसानों के पास रोज मैसेज भेजे जा रहे हैं, लेकिन मंडी परिसर में बोरियां नहीं होने के कारण समर्थन मूल्य पर तुलाई नहीं हो पा रही है। किसान इस भीषण गर्मी में गेहूं वापस ले जाने को विवश हैं। किसान मैसेज मिलने पर गेहूं लेकर तुलाई केंद्र पर पहुंच रहे हैं।
राजफेड तुलाई केंद्र पर 2750 रुपए समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद की जा रही थी, लेकिन बोरियां खत्म होने से किसानों को वापस लौटना पड़ रहा है। कई किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में गेहूं भरकर सुबह से देर रात तक केंद्र पर बैठे रहने को मजबूर हैं। क्रय विक्रय सहकारी समिति के कर्मचारी सुरेश कुमार और पप्पू दांगी ने बताया कि तीन दिन से तुलाई के लिए बोरियां समाप्त हो चुकी हैं। राजफैड में अब तक 826 किसानों की 82,343 बोरी गेहूं की तुलाई हो चुकी है।
वहीं, तिलम संघ में 380 किसानों की 37,200 बोरी गेहूं आया है। समिति द्वारा बोरियों के लिए सूचना भिजवा दी गई है। किसान बार-बार आकर कर्मचारियों से पूछ रहे हैं कि गेहूं तुलाई कब शुरू होगी और बोरियां कब तक आएंगी। कर्मचारियों का कहना है कि बोरियां आने के बाद ही गेहूं तुलाई शुरू की जाएगी। तुलाई केंद्र पर गेहूं के बैग भी पड़े हैं। वेयरहाउस में गाड़ियां दो-तीन दिन में खाली हो रही हैं। प्लेटफार्म पर भी गेहूं की बोरियां पड़ी हैं।