Jalore: मांडवला में भीषण जल संकट, 15 से 20 दिन में सप्लाई में एक दो घड़े पानी मिल रहा, ग्रामीणों ने जताया आक्रोश

जालोर/ मांडवला। नर्मदा परियोजना में सप्लाई सिस्टल बहाली रखने के विभागीय दावे की पोल खुल रही है। जालोर शहर में ही सप्लाई का शैड्यूल 4 से 5 दिन तक पहुंच चुका है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों हालात विकट है। जिले के मांडवला गांव में पेयजल व्यवस्था बदहाल होने से ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में 15 से 20 दिन में एक बार ही पानी की सप्लाई हो रही है, वह भी आधी-अधूरी। ऐसे में लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के लाइनमैन पर मनमानी करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पैसे लेकर कुछ क्षेत्रों में नियमित सप्लाई दी जा रही है, जबकि आम लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बार बार शिकायत के बावजूद जलापूर्ति नहीं हो रही।

मजबूरी में टैंकरों से महंगे दामों पर पानी मंगवाना पड़ रहा है। विभागीय स्टाफ को शिकायत करने पर भी उसका समाधन नहीं हो रहा। दूसरी तरफ जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मांडवला में सप्लाई पूरी तरह से नर्मदा परियोजना आधारित है। यहां 3 लाख लीटर का उच्च जलाशय बना हैं। जिससे सप्लाई होती है। परियोजना में क्लोजर से मांडवला समेत थलूंडा, बालवाड़ा, आंवलोज समेत अन्य गांव कस्बों में भी सप्लाई प्रभावित है।

ग्रामीणों ने जताया विरोध, चेतावनी दी

ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए विभाग से जल्द कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो गांव में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं होने पर जलदाय विभाग कार्यालय का घेराव भी किया जा सकता है।

ग्रामीणों ने लगाए मनमानी के आरोप

युवा सूरज कुमारी ने कहा कि गर्मी के मौसम में भीषण जल संकट की स्थिति बनी हुई है। लाइनमैन मनमर्जीपूर्वक सप्लाई करना है। जहां लेनदेन है, वहां सप्लाई समय पर होती है। बाकी क्षेत्रों में 15 से 20 दिन में सप्लाई होती है। नरेश कुमार का कहना है कि विभाग को समस्या से अवगत करवाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। गृहिणी पूरी देवी का कहना है कि गर्मी मे मौसम में टैंकरों से पानी सप्लाई करवानी पड़ रही है।

जालोर-टैंकरों से सप्लाई बढ़ी

21 दिन तक का क्लोजर नर्मदा परियोजना में प्रभावी है। 21 मई तक मरम्मत और रखरखाव कार्य के चलते ये हालात बने हैं। जालोर शहर समेत 300 गांव कस्बों के लिए तैतरोल में बने स्टॉक टैंक से पानी की सप्लाई की बात कही जा रही है। लेकिन हालात विकट है। जालोर शहर में ही 5 से 7 दिन के अंतराल में सप्लाई मिल रही है। दूसरी तरफ गांवों में तो सप्लाई सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया है। विकट हालातों में लोगों को टैंकरोंसे पानी मंगवाना पड़ रहा है।

इन्होंने कहा

नर्मदा परियोजना क्लोजर से मांडवला क्षेत्र में सप्लाई प्रभावित है। इसी तरह ट्रंक लाइन के अन्य गांवों की सप्लाई भी प्रभावित है। पानी की उपलब्धता में कमी प्रमुख समस्या है। शैड्यूल के अनुसार ही सप्लाई होती है। ग्रामीणों की ओर से लगाए जा रहे आरोपियों की जांच की जाएगी।

रूपेंद्रसिंह, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, सायला