Panchna Dam Update: हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अफसरों में मची हलचल, अब पांचना बांध का पानी नहरों में छोड़ने की तैयारी

Karauli News: करौली जिले के सबसे बड़े पांचना बांध के पानी को लेकर चल रहे विवाद मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब जल संसाधन विभाग के अधिकारी अलर्ट हुए हैं। एक दिन पहले राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से पांचना बांध से जुड़ी नहरों में तीन सप्ताह के भीतर बांध का पानी छोड़ने के आदेश के बाद विभागीय अधिकारियों में हलचल मची है। विभाग के उच्च स्तर से अस्थायी तौर पर पांचना बांध सहित नहरी विभागीय अभियंताओं की तैनाती की गई है।

विभागीय एडिशनल चीफ इंजीनियर सुरेशचन्द कठानिया भी करौली पहुंचे, जिन्होंने पांचना बांध सहित नहरों का अवलोकन किया। स्थानीय विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों को नहरों की जल्दी सफाई कराने के निर्देश दिए। मौके पर कई जगह मिट्टी भराव और नहरों के क्षतिग्रस्त स्थिति को लेकर उन्होंने शीघ्र उन्हें दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। इस दौरान एडिशनल चीफ इंजीनियर ने पांचना बांध से लेकर सवाईमाधोपुर जिले के वजीरपुर उपखण्ड के कुंसाय गांव तक की नहरों का जायजा लिया।

नहरों में तीन सप्ताह के भीतर पांचना बांध का पानी छोड़ने के निर्देश

गौरतलब है हाईकोर्ट ने एक दिन पहले करौली जिले के पांचना बांध से जुड़ी नहरों में तीन सप्ताह के भीतर बांध का पानी छोड़ने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने गंगापुरसिटी विधायक रामकेश मीना सहित ग्रामोत्थान संस्था की जनहित याचिकाओं पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पानी न खोलने का कारण पूछा, तो विभाग ने कोई ठोस जवाब देने के बजाय पालना के लिए चार माह का समय मांगा।

सरकार की ओर से नहरों की सफाई के लिए समय देने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने समय देने के आग्रह को खारिज करते हुए कहा कि अब समय नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि 26 मई 2026 तक आदेश की पालना नहीं हुई, तो कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद विभागीय अधिकारी अलर्ट हुए हैं।

इनको मिली जिम्मेदारी

विभाग के सहायक शासन सचिव की ओर से गंगापुर, दौसा, जयपुर लालसोट, बाड़ी, मनिया आदि स्थानों से अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंताओं को पांचना बांध और नहरों की मॉनीटरिंग के लिए अस्थायी रूप से अग्रिम आदेश तक लगाया गया है।

नहरों की चल रही मरम्मत और सफाई

इधर जल संसाधन विभाग के श्रीमहावीरजी के सहायक अभियंता विपिन मीना ने बताया कि पांचना बांध की नहरों की सफाई और मरम्मत का कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि 11 करोड़ 46 लाख रुपए की राशि से बांध की करीब 137 किलोमीटर लम्बी नहरों की सफाई और मरम्मत का कार्य कराया जाएगा। गत 9 मार्च से शुरू हुआ यह कार्य दो वर्ष में पूरा होना है।

यह है मामला

पांचना बांध से वर्ष 2005 के बाद से सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा जा सका है। इसके पीछे कारण बांध के समीपवर्ती क्षेत्र के किसानों द्वारा आसपास के 39 गांवों में पानी उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। जबकि कमाण्ड क्षेत्र के किसान लगातार पानी छोडऩे की मांग कर रहे हैं। बांध के आसपास के किसान बांध से पहले उन्हें पानी देने की मांग कर रहे हैं। गुड़ला-पांचना संघर्ष समिति से जुड़े गांवों के लोगों का कहना है कि बांध निर्माण के दौरान उनकी जमीन चली गई और उन्हें ही पानी नहीं रहा है, जबकि पहले पानी उन्हें मिलना चाहिए।

इस पर सरकार की ओर से गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना का निर्माण कराया गया, लेकिन बांध के समीपवर्ती किसानों का कहना है कि इस परियोजना से क्षेत्र के सभी गांवों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा। ऐसे में पहले सभी 39 गांवों के लिए पानी की मांग की जा रही है। इसकी चलते प्रशासन और सरकार स्तर से कई बार नहरों में पानी छोडऩे को सहमति बनाने के लिए कमाण्ड और अनकमाण्ड क्षेत्र के किसानों से बैठक कर वार्ता की गई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। गौरतलब है कि इस बांध से करौली व सवाईमाधोपुर जिलों के कुल 35 गांवों की 9985 हैक्टेयर भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन पानी के विवाद के चलते बीते दो दशक से नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा सका है।