नवीन पेयजल स्कीम भी नहीं कर सकी कंठ तर, टूटी लाइनें और गंदा पानी बनी जलदाय विभाग की पहचान

dholpur, राजाखेड़ा. चुनाव पूर्व आनन फानन में शहरी क्षेत्र के लिए स्थापित शहरी पुनर्गठित पेयजल योजना में 13 करोड़ रुपए की भारी लागत फूंकने के बाद भी उपखंड मुख्यालय की शहरी आबादी अब भी गंदे पानी के वितरण और दावे के पूरा न होने से जलदाय विभाग के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लग रहा है। वहीं आम करदाताओं के मेहनत से कमाई गई राशि पर दिए गए करों की बर्बादी से शिक्षित वर्ग तो सरकार से भी बेहद ही नाराज है। अनेक लोग मामले को स्थायी लोक अदालत भी लेकर गए जहां न्यायालय की तल्ख टिप्पणियां एभी विभाग की नींद को नहीं खोल पाई। और आम उपभोक्ता मोटा बिल भरकर भी गंदे पेयजल की वजह से परेशान हैं। सारे प्रकरण में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के नाम से जाना जाने वाला विभाग अब जन स्वास्थ्य खिलवाड़ विभाग का काम करता नजर आ रहा है। जहां आमजन की शिकायतो से अधिकारियों का कोई सरोकार नहीं है और वे कार्यालयों के कमरों में बैठकर आमजन की पीड़ा से बेहद दूर नजर आते है। आम जनता के अनुसार अब तो शिकायते कर कर के हार चुके है और अब शिकायतें करने की जगह पैसा खर्च कर आर ओ प्लांट्स से पानी खरीदने को अपनी किस्मत संमझ बैठे हैं

दूषित पेयजल बीमारियों का घर

भारतीय आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य को 80 फीसदी बीमारियां पानी की वजह से होती है। लेकिन उपखंड मुख्यालय पर तो नई स्कीम के बाद भी लगातार गंदे पानी का वितरण गंभीर बीमारियों के फैलने का कारण बनता जा रहा है और जिम्मेदार देख कर भी अनदेखा कर रहे हैं। हालात ये है कि कुल सप्लाई समय में से पहले 10 से 15 मिनट तो बेहद गंदा पानी आता है जो बदबूदार काले रंग का होता है। उसके बाद ही साफ पानी आता है लेकिन उसके भी इंफेक्टिड होने की आशंका में लोग उसे भी सिर्फ साफ सफाई के कार्यों में ही इस्तेमाल कर पाते है। लेकिन सप्लाई इतनी कम है कि यह छोटे परिवारों की भी पूर्ति नहीं कर पाता।

एक समय भी पूरी आपूर्ति भी पूरी नहीं…

दो वर्ष पूर्व स्कीम आरम्भ करने से पूर्व विभाग का दावा था कि प्रात: शाम दोनों समय निश्चित समय पर एक एक घंटे जलापूर्ति की जाएगी। इसके लिए कुल 22 लाख लीटर प्रतिदिन की स्थापित क्षमता की ओवरहेड टंकियां बनाई गई थी और एक दर्जन से अधिक बोरवेल स्थापित किए गए जो अधिकांश उत्तनगन नदी के किनारे खोदे गए और 6 से 7 किलोमीटर लाइन डालकर पानी लाया गया लेकिन ।13 करोड़ खर्च कर 22 लाख लीटर पानी के दावा न जाने कहाँ खो गया और सिर्फ एक समय 15 से 25 मिनिट की ही आपूर्ति की जा रही है जो ऊंट के मुंह मे जीरे के समान है और सरकार की पूरी कवायद शून्य दिखाई दे रही है।

लीकेज बनी गंदे पानी का कारण

पूरी स्कीम में विभाग की लाईने क्षतिग्रस्त पड़ी है ।विभाग की लापरवाही से चलते अधिकांश कनेक्शन अवैध रूप से किए गए हैं जो लीकेज का सबसे बड़ा कारण है।सप्लाई बंद होते ही लीकेज से गड्डों में भरा गंदा पानी लाइन में वापस भर सप्लाई को पूरा प्रदूषित कर रहा है। राइजिंग लाइन में अवैध कनेक्शन टंकियों को भरने नहीं दे रही। पर विभाग का मूल समस्याओं पर कोई ध्यान नही है।- गंदा पानी का वितरण नहीं रोक सकते तो ऐसे विफल अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं करता प्रशासन। वर्षों से शिकायत चली आ रही है।

-अशोक पाराशर उपभोक्ता

वर्षों की न्यायिक लड़ाई के बाद भी जो विभाग सुधर नहीं पाया उससे क्या उम्मीद की जाए। घर से दूर बोरवेल करवाया ओर अपनी निजी लाइन डालकर काम चला रहे है।

– सुरेश उपभोक्ता                        

– हमें तो पुरानी स्कीम ही लौटा दो। और इसको बनाने वाले अधिकारियों से इस राशि की वसूली कर लो। हम बिल भरते है पानी चाहिए। 15 से 20 मिनट की सप्लाई से दो जनों का भी काम नहीं चल सकता। अधिकारी सुनते नहीं है।

– सुमन गृहणी