Cancer Treatment: कैंसर उपचार में क्या खत्म हो जाएगी कीमोथेरेपी ? कैंसर इलाज में आ रही बड़ी क्रांति

Cancer Awareness: जयपुर. कैंसर जैसे जटिल रोग के खिलाफ लड़ाई में अब भारत नई दिशा में कदम बढ़ा रहा है। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि आधुनिक चिकित्सा अनुसंधानों में कीमोथेरेपी जैसी पारंपरिक और कठिन प्रक्रिया के विकल्प के रूप में टैबलेट आधारित उपचार (ओरल थेरेपी) की पहल बेहद उत्साहजनक है। यह बदलाव न केवल मरीजों के लिए सुविधाजनक है, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बना सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ओरल कैंसर थेरेपी यानी टैबलेट के रूप में दी जाने वाली दवाएं उन मरीजों के लिए राहत लेकर आई हैं, जिन्हें बार-बार अस्पताल जाकर कीमोथेरेपी लेनी पड़ती थी। इससे साइड इफेक्ट्स कम होने के साथ इलाज अधिक सहज हो सकता है। हालांकि, यह उपचार सभी प्रकार के कैंसर के लिए नहीं, बल्कि चयनित मामलों में ही प्रभावी है और डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी है।

उप राष्ट्रपति ने कैंसर से बचाव के लिए युवाओं को खास संदेश देते हुए कहा कि तंबाकू, नशीले पदार्थ और अस्वस्थ जीवनशैली इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समय रहते जागरूकता बढ़ाई जाए तो कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

कैंसर मरीजों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज

इस मौके पर यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कैंसर मरीजों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी शामिल हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बड़ी राहत मिल रही है।

टीबी मुक्त अभियान की तर्ज पर चले “कैंसर मुक्त राजस्थान”

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने टीबी मुक्त अभियान की तर्ज पर “कैंसर मुक्त राजस्थान” अभियान चलाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारण भी जिम्मेदार हैं, जैसे दूषित पानी, रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग और प्रदूषण।

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर से बचाव के लिए नियमित जांच, वैक्सीनेशन (विशेषकर सर्वाइकल कैंसर के लिए), संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली बेहद जरूरी है। समय पर पहचान और सही इलाज से इस बीमारी को हराया जा सकता है।

कुल मिलाकर, कैंसर के खिलाफ लड़ाई अब केवल इलाज तक सीमित नहीं रही, बल्कि जागरूकता, रोकथाम और नई तकनीकों के समन्वय से इसे हराने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।