IPS Paris Deshmukh : राजस्थान कैडर से रिलीव हुआ ये ‘सिंघम’, मिली और बड़ी ज़िम्मेदारी, जानें जांबाज़ी के चर्चित किस्से

राजस्थान की कानून व्यवस्था को कई मोर्चों पर संभालने वाले और अपराधियों के दिलों में खौफ का दूसरा नाम बन चुके सीनियर IPS अफसर परिस देशमुख (PARIS ANIL DESHMUKH) अब दिल्ली के साथ-साथ देश की सीमाओं की निगहबानी करते नजर आएंगे। 21 मई 2026 को जारी सरकारी आदेश के बाद उन्हें राजस्थान कैडर से कार्यमुक्त कर दिया गया है। वे अब सीमा सुरक्षा बल (BSF) में बतौर डीआईजी (DIG) अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।

IPS परिस देशमुख की छवि राजस्थान पुलिस में एक ऐसे सख्त लेकिन बेहद संवेदनशील अधिकारी की रही है, जो AC कमरों में बैठने के बजाय खुद रात-रात भर फील्ड में रहकर ऑपरेशन्स को लीड करते हैं। आइए जानते हैं कंप्यूटर इंजीनियरिंग से लेकर देश की सीमाओं की सुरक्षा की कमान संभालने वाले इस ‘रीयल लाइफ सिंघम’ की पूरी इनसाइड स्टोरी।

IPS Paris Deshmukh relieving letter

कभी NDA कैडेट्स को देते थे कंप्यूटर ट्रेनिंग

मूल रूप से महाराष्ट्र के गोंदिया के रहने वाले परिस देशमुख का जन्म 30 जुलाई 1985 को हुआ था। वे शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी होनहार थे।

एजुकेशन बैकग्राउंड: उन्होंने देश के प्रतिष्ठित महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से साल 2003 से 2007 के बीच कंप्यूटर इंजीनियरिंग (B.E. Computer) की डिग्री हासिल की।

NDA कैडेट्स के ट्रेनर: सिविल सर्विसेज में आने से पहले उन्होंने अपनी तकनीकी कुशलता का उपयोग देश की सेवा के लिए शुरू कर दिया था। वे NIIT में एक सॉफ्टवेयर ट्रेनर के रूप में काम कर रहे थे, जहां उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के युवा कैडेट्स को कंप्यूटर की बुनियादी और एडवांस ट्रेनिंग दी।

IPS Paris Deshmukh – File PIC

UPSC में पाई सफलता: देश के भावी फौजियों को ट्रेनिंग देने के दौरान ही उनके मन में वर्दी पहनने का जज्बा जागा। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की और साल 2010 में सीधे भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुन लिए गए, जहाँ उन्हें राजस्थान कैडर अलॉट हुआ।

जब लगा दी थी जान की बाजी

परिस देशमुख के करियर की शुरुआत ही बेहद चुनौतीपूर्ण और खतरनाक रही। साल 2012-13 में जब वे अलवर के भिवाड़ी इलाके में बतौर ट्रेनी असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) तैनात थे, तब उन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी थी।

IPS Paris Deshmukh – File PIC

2013 का वो खौफनाक एनकाउंटर: अलवर का मेवाती गैंग उस दौर में हाईवे पर लूटपाट और लग्जरी गाड़ियां छीनने के लिए कुख्यात था। एक रात मुखबिर की सूचना पर आईपीएस परिस देशमुख ने अपनी 18 सदस्यीय पुलिस टीम के साथ मुगास्का गांव के पास बदमाशों को घेर लिया।

खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर देसी कट्टों और बंदूकों से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोली के छर्रे परिस देशमुख के चेहरे और शरीर पर लगे। वे गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन इस युवा अफसर ने हौसला नहीं खोया। पूरी टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए दो बड़े वाहन चोरों को दबोच लिया, जिन्होंने बाद में 30 से अधिक लग्जरी गाड़ियां लूटने का गुनाह कबूला।

जब भीड़ के बीच से पुलिसकर्मियों को खींचकर निकाला

Anandpal Encounter Case – File PIC

साल 2017 में जब राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह का एनकाउंटर हुआ, तो नागौर के सांवराद गांव में भारी जनआक्रोश और हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे थे। उस वक्त परिस देशमुख नागौर के एसपी (SP) थे।

हजारों की उग्र भीड़ ने गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) स्टेशन को चारों तरफ से घेरकर आग लगाने की कोशिश की। कई पुलिसकर्मी अंदर फंस गए थे। उग्र भीड़ पथराव और पेट्रोल बम फेंक रही थी। ऐसे में एसपी परिस देशमुख ने खुद आगे बढ़कर मोर्चा संभाला।

उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर भीड़ के बीच घुसकर अपने साथी पुलिसकर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस हिंसक झड़प में वे खुद भी गंभीर रूप से घायल हुए थे, लेकिन उनकी सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया।

शहीद कांस्टेबल की बहन की शादी में ‘भाई’ बनकर पहुंचे

आईपीएस परिस देशमुख जितने मैदान पर सख्त हैं, अंदर से उतने ही भावुक और अपनी फोर्स से प्यार करने वाले इंसान हैं। सांवराद बवाल के दौरान नागौर पुलिस के एक जांबाज कांस्टेबल खुमाराम शहीद हो गए थे।

सालों बाद जब साल 2023 में शहीद खुमाराम की बहन संगीता की शादी तय हुई, तो आईपीएस परिस देशमुख इस परिवार को नहीं भूले। वे राजस्थान के रीति-रिवाजों के मुताबिक पारंपरिक ‘मायरा’ (भाई द्वारा दिया जाने वाला भात/उपहार) लेकर खुद शहीद के गांव पहुंचे।

शहीद खुमाराम की बहन संगीता की शादी में मायरा लेकर पहुंचे #IPS श्री देशमुख परिस अनिल। #आनंदपाल प्रकरण में शहीद हुए थे #नागौर निवासी सिपाही खुमाराम।

खुमाराम की शहादत के समय श्री देशमुख परिस अनिल थे नागौर #SP#RajasthanPolice @NagaurPolice @DCPNORTH_JAIPUR pic.twitter.com/wWbl7FhlKy

— Rajasthan Police (@PoliceRajasthan) November 30, 2022

उन्होंने एक सगे भाई की तरह शादी की रस्मों में हिस्सा लिया और शहीद की बहन को आशीर्वाद दिया। खाकी का यह मानवीय और इमोशनल रूप देखकर पूरा राजस्थान भावुक हो उठा था और सोशल मीडिया पर इस कदम की जमकर तारीफ हुई थी।

‘फेक डिग्री रैकेट’ का भंडाफोड़

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने से ठीक पहले आईपीएस परिस देशमुख जयपुर में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) में बतौर डीआईजी तैनात थे। राजस्थान में जब पेपर लीक और फर्जी डिग्री का मुद्दा चरम पर था, तब उन्होंने एजुकेशन माफियाओं के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की।

IPS Paris Deshmukh – File PIC

उन्होंने चूरू की मशहूर ओपीजेएस (OPJS) यूनिवर्सिटी द्वारा धड़ल्ले से बांटी जा रही फर्जी डिग्रियों के काले कारोबार को बेनकाब किया। उनकी कड़े निर्देशन में की गई जांच के बाद यूनिवर्सिटी के चांसलर और मुख्य कर्ताधर्ताओं को सलाखों के पीछे भेजा गया। इस कार्रवाई ने पूरे देश के शिक्षा जगत में तहलका मचा दिया था।

राजस्थान में शानदार सर्विस टाइमलाइन (2010 – 2026)

आईपीएस परिस देशमुख का राजस्थान में कार्यकाल बेहद वर्सेटाइल रहा है। उन्होंने राज्य के लगभग सभी संवेदनशील जिलों और पुलिस कमिश्नरेट में अपनी सेवाएं दी हैं।

क्र. सं.धारित पद (Post Held)तैनाती का स्थान / विभागपदभार ग्रहण तिथि (Joining)कार्यमुक्ति तिथि (Relieving)मुख्य प्रशासनिक कार्य व उपलब्धियां1डीआईजी (DIG)सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारत सरकार, नई दिल्ली21/05/2026वर्तमान में कार्यरत5 साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा की कमान।2डीआईजी (DIGP)स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG), जयपुर16/02/202423/02/2024 (प्रोसेस)फर्जी डिग्री रैकेट (OPJS यूनिवर्सिटी) का भंडाफोड़ और पेपर लीक माफियाओं पर नकेल।3जिला पुलिस अधीक्षक (SP)सीकर (Sikar)07/08/202319/02/2024शेखावाटी क्षेत्र में गैंगस्टर संस्कृति और रंगदारी (Extortion) नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया।4जिला पुलिस अधीक्षक (SP)श्रीगंगानगर (Sriganganagar)13/02/202321/02/2023भारत-पाक सीमा से सटे जिले में ड्रोन के जरिए होने वाली ड्रग्स तस्करी पर बड़ा एक्शन।5पुलिस उपायुक्त (DCP)जयपुर सिटी (नॉर्थ), कमिश्नरेट04/01/202120/02/2023परकोटा क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और लॉ एंड ऑर्डर को मजबूत करने में सफल।6जिला पुलिस अधीक्षक (SP)चूरू (Churu)03/07/202006/01/2021अपराध नियंत्रण और स्थानीय पुलिसिंग को डिजिटल रूप से अपग्रेड किया।7जिला पुलिस अधीक्षक (SP)अलवर (Alwar)09/05/201906/07/2020मेवात क्षेत्र में गौ-तस्करी और साइबर ठगी के अड्डों पर ताबड़तोड़ छापेमारी।8पुलिस अधीक्षक (SP)ए.टी.एस. (ATS), राजस्थान, जयपुर06/01/201910/05/2019टेरर फंडिंग और संदिग्ध गतिविधियों पर खुफिया नजर रखने का बेहतरीन काम।9पुलिस अधीक्षक (SP)विजिलेंस (Vigilance), जयपुर26/07/201801/08/2018पुलिस महकमे के भीतर आंतरिक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ जांच।10जिला पुलिस अधीक्षक (SP)झुंझुनू (Jhunjhunu)19/07/2018–/–/—-सैनिक बाहुल्य क्षेत्र में कम्युनिटी पुलिसिंग और युवाओं के लिए अवेयरनेस प्रोग्राम चलाए।11जिला पुलिस अधीक्षक (SP)नागौर (Nagaur)30/06/201609/07/2016आनंदपाल एनकाउंटर के बाद पैदा हुए सांवराद हिंसक उपद्रव को सूझबूझ से शांत कराया।12जिला पुलिस अधीक्षक (SP)बाड़मेर (Barmer)27/10/201404/07/2016सीमावर्ती क्षेत्र में कड़ा पहरा और अवैध रिफाइनरी-क्रूड ऑयल चोरी पर पूर्ण प्रतिबंध।13जिला पुलिस अधीक्षक (SP)बारां (Baran)07/01/201427/10/2014हाड़ौती अंचल में स्थानीय गैंग्स पर लगाम और आमजन में विश्वास कायम किया।14सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP)भिवाड़ी, अलवर (ट्रेनी)08/10/201210/01/2014करियर का पहला बड़ा एनकाउंटर; हाईवे लुटेरों की गोली से घायल होने के बाद भी बदमाशों को पकड़ा।

मिला ‘पुलिस विशेष कर्तव्य पदक’

आईपीएस परिस देशमुख के बेहतरीन काम और अदम्य साहस को देखते हुए सरकार भी उन्हें समय-समय पर सम्मानित करती रही है। साल 2024 में कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखने और हाई-रिस्क जोन में निरंतर उत्कृष्ट सेवाएं देने के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘पुलिस विशेष कर्तव्य पदक’ (Police Special Duty Medal) से नवाजा गया था।