Churu News : सुजानगढ़. किसानों को उपज का उचित दाम दिलाने के लिए सरकार हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद केंद्र खोलती है, लेकिन सुजानगढ़ में इन केंद्रों की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। कृषि उपज मंडी परिसर स्थित खरीद केंद्र पर सरसों बेचने के लिए अब तक एक भी किसान नहीं पहुंचा, जबकि 85 किसानों ने पंजीयन कराया था।
चने में भी फीकी रही खरीद
सिर्फ सरसों ही नहीं, चने की खरीद का हाल भी लगभग ऐसा ही रहा। चना बेचने के लिए 50 किसानों ने पंजीयन कराया, लेकिन खरीद केंद्र तक केवल 23 किसान ही पहुंचे। अब तक कुल 375 क्विंटल चना 5875 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया है।
बाजार भाव और एमएसपी में कम अंतर
किसानों की उदासीनता के पीछे सबसे बड़ा कारण बाजार भाव और समर्थन मूल्य में ज्यादा अंतर नहीं होना माना जा रहा है। किसान स्थानीय व्यापारियों और मंडी में सीधे बिक्री को ज्यादा सुविधाजनक मान रहे हैं। साथ ही खरीद केंद्र देर से शुरू होना, सीमित फसलों की खरीद और भुगतान प्रक्रिया को लेकर बनी धारणा भी किसानों को दूर कर रही है।
10-15 दिनों से नहीं पहुंचा कोई किसान
खरीद केंद्र पर 1 अप्रेल 2026 से चना और सरसों की खरीद शुरू हुई थी, जो 31 मई तक चलेगी। लेकिन पिछले 10 से 15 दिनों से केंद्र पर एक भी किसान अपनी उपज लेकर नहीं पहुंचा है। इससे खरीद केंद्र पूरी तरह सूना पड़ा है और मंडी यार्ड खाली नजर आ रहे हैं।
बाजरा की अच्छी पैदावार, फिर भी खरीद से बाहर
क्षेत्र में इस बार बाजरा की अच्छी पैदावार हुई है, लेकिन किसानों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि बाजरा (Millet) खरीद व्यवस्था में शामिल नहीं है। किसानों का कहना है कि यदि प्रमुख फसलों को समर्थन मूल्य खरीद में शामिल किया जाए तो उन्हें राहत मिल सकती है।
व्यवस्थाएं पूरी, फिर भी इंतजार में स्टाफ
खरीद केंद्र प्रशासन ने समुचित वरदाना, सीसीटीवी कैमरे (CCTV Camera) और तुलाई कांटे (weighing scale) सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर रखी हैं। चना खरीद कर नागौर के सीडब्ल्यूसी वेयरहाउस (Nagaur CWC Warehouse) भेजा गया है और राहत की बात यह है कि किसानों को भुगतान भी मिल चुका है। इसके बावजूद केंद्र का स्टाफ किसानों का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।