जयपुर: आज के डिजिटल युग में जहां बच्चे गर्मियों की छुट्टियों का अधिकांश समय मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया पर बिताते हैं। वहीं, जयपुर शहर में एक सराहनीय और अनूठी पहल की शुरुआत हुई है। रविवार से शहर के 62 विभिन्न जैन मंदिरों में ‘संस्कार शिक्षण शिविरों’ का भव्य शुभारंभ हुआ है, जिसमें बच्चे आधुनिक चकाचौंध से दूर संस्कारों के साथ धार्मिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर एवं अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ये विशेष शिविर आगामी 28 मई तक चलेंगे। 10 दिनों तक चलने वाले इन शिविरों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि बापूनगर स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय में बच्चों ने शिविर के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने की सामूहिक शपथ ली।
धार्मिक शिक्षा और संस्कारों का पाठ
शिविर के पहले दिन बच्चों ने अत्यंत उत्साह के साथ भगवान को श्रीफल अर्पित कर सत्र की शुरुआत की। इस दौरान दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर की बालिका छात्रावास की विदुषी छात्राओं द्वारा बच्चों को धार्मिक शिक्षा दी जा रही है। ये छात्राएं बच्चों में जीवनोपयोगी संस्कारों, अनुशासन और जैन धर्म के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा’ के मूल्यों का विकास कर रही हैं।
शोभायात्रा और भव्य उद्घाटन
इस धार्मिक उत्सव के तहत निर्माण नगर स्थित पार्श्वनाथ कॉलोनी में बैंड-बाजों के साथ एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शिविर का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि सुशीला अशोक पाटनी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर अधिष्ठात्री शीला ड्योडा और आंचल अध्यक्षा शालिनी बाकलीवाल भी विशेष रूप से मौजूद रहीं। वहीं, दूसरी ओर जनकपुरी मंदिर में मूलनायक नेमिनाथ भगवान को श्रीफल अर्पित करने के बाद केसरिया ध्वज के साथ पथ संचालन किया गया।
इन प्रमुख स्थानों पर हो रहा आयोजन
प्रचार-प्रसार प्रभारी पदम जैन के अनुसार, शहर के विभिन्न क्षेत्रों में इन शिविरों को लेकर भारी उत्साह है। यह आयोजन मुख्य रूप से निम्नलिखित स्थानों पर किया जा रहा है। शांतिनगर (सांगानेर) और राधाविहार, सेक्टर-3 (मालवीय नगर) और नया बाजार (चौमूं), पद्मावती कॉलोनी और खंडाका जैन मंदिर, महल योजना (जगतपुरा) और शांतिनाथ मंदिर (धाबास)। इसके अतिरिक्त, दुर्गापुरा में आर्यिका अर्हम् श्री के पावन सान्निध्य में भी शिविर का सफल आयोजन किया जा रहा है, जहां बच्चे बड़ी संख्या में संस्कार और संस्कृति का पाठ सीख रहे हैं।