नागौर. राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के किनारे किए गए अतिक्रमणों को हटाने के मामले में अब प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता की ओर से 23 जनवरी 2026 को जारी आदेश के आधार पर अब जिलों से कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी जा रही है। आगामी दिनों में हाईकोर्ट में पालना रिपोर्ट पेश की जानी है, जिसके चलते विभागीय अधिकारियों में हलचल बढ़ गई है।
नागौर में यातायात शाखा की ओर से जिला परिषद, नगर निकायों, पीडब्ल्यूडी और संबंधित अधिकारियों से राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के किनारे हटाए गए अतिक्रमणों की जानकारी मांगी गई है। यातायात प्रभारी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि डीबी सिविल रिट याचिका, हिम्मत सिंह गेहलोत बनाम राज्य सरकार प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों की पालना में यह सूचना तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
फेक्ट फाइल
नागौर जिले में कुल एनएच – 5
एनएच की लम्बाई – 394.25 किलोमीटर
नागौर जिले में कुल स्टेट हाईवे – 21
एसएच की कुल लम्बाई – 886.85 किलोमीटर
एनएच व एसएच की कुल लम्बाई – 1281.10 किलोमीटर
बढ़ते अवैध निर्माण और सडक़ हादसों को लेकर हाईकोर्ट गंभीर
दरअसल, हाईकोर्ट ने हाईवे किनारे बढ़ते अवैध निर्माण और सडक़ हादसों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद 23 जनवरी को जारी आदेश में अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी जिला कलक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजमार्ग के मध्य बिंदु से 75 मीटर की सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक निर्माण कानूनन अस्वीकार्य माना जाएगा और उसे हटाना अनिवार्य होगा। आदेश में यह भी कहा गया कि राजस्व विभाग, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई संयुक्त सर्वे कर ऐसे निर्माणों की पहचान करेंगे तथा अवैध पाए जाने पर नोटिस देकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेंगे। साथ ही बिना एनओसी के भूमि रूपांतरण पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मांगी जानकारी
नागौर यातायात शाखा ने जिले में एनएच और एसएच मार्गों के भीतर किए गए अतिक्रमणों, हटाई गई संरचनाओं और की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट में पेश होने वाली पालना रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि विभिन्न जिलों में सडक़ सुरक्षा को लेकर क्या कार्रवाई की गई और 75 मीटर की सीमा के भीतर बने अवैध निर्माणों पर कितना नियंत्रण किया गया।
सरकार का स्पष्ट संदेश
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं चाहती। कोर्ट की सख्ती के बाद अब जिलों में कार्रवाई की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। सडक़ सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि नियमों के विपरीत बने निर्माणों को किसी भी स्थिति में संरक्षण नहीं दिया जाएगा।