Rajasthan: पुलिस हिरासत में मौत पर डीजीपी का सख्त फरमान, टॉर्चर रूम नहीं बनें थाने, जारी हुआ नया सर्कुलर

उदयपुर। पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों और मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस मुख्यालय ने थानों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें गिरफ्तारी के बाद मेडिकल जांच, पूछताछ की निगरानी, लॉकअप की नियमित जांच और हर कार्रवाई का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। इससे पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी और हिरासत में प्रताड़ना या संदिग्ध मौत के मामलों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

हिरासत में मौत : दो साल में 21 मामले

प्रदेश में जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच दो साल की अवधि में पुलिस हिरासत में मौत के 21 मामले सामने आए। पुलिस हिरासत में मौत के मामलों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच पुलिस मुख्यालय ने थानों और पुलिस अधिकारियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू किए हैं।

अतिरिक्त महानिदेशक (सिविल राइट्स एवं कम्युनिटी पुलिसिंग) डॉ. हवासिंह घुमरिया ने आदेश जारी किया है। नए सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारी की होगी।

आरोपी के शरीर की करानी होगी पूरी जांच

गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी या संदिग्ध व्यक्ति की मेडिकल जांच कराई जाएगी। यदि व्यक्ति बीमार है, नशे की हालत में है या उसके शरीर पर चोट के निशान हैं तो उसका पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके अलावा हिरासत के दौरान जरूरत पड़ने पर दोबारा मेडिकल परीक्षण कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।

पूछताछ में नहीं होगा अमानवीय व्यवहार

लॉकअप और पूछताछ प्रक्रिया की निगरानी को भी अनिवार्य किया गया है। थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की नियमित मॉनिटरिंग होगी और फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पूछताछ के दौरान किसी तरह की मारपीट या अमानवीय व्यवहार न हो।

निर्देश में यह बदलाव

गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को देने और गिरफ्तारी का रिकॉर्ड तुरंत अपडेट करने पर जोर।

हिरासत में लिए गए व्यक्ति के अधिकारों की जानकारी उसे दी जाए।

थाना प्रभारी और सर्किल अधिकारियों को लॉकअप का नियमित निरीक्षण करने की जिम्मेदारी।

यदि हिरासत में मौत या गंभीर प्रताड़ना की शिकायत आती है तो अधिकारियों की जवाबदेही।

निर्देशों का उद्देश्य महज कार्रवाई नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकना है।

थानों में संवेदनशीलता बढ़ाने, रिकॉर्ड प्रणाली मजबूत करने, नियमित निरीक्षण पर फोकस।

इन बिंदुओं पर सबसे ज्यादा जोर

नई गाइडलाइन में गिरफ्तारी पर मेडिकल जांच, लॉकअप की नियमित निगरानी, सीसीटीवी कैमरों की कार्यशील स्थिति, पूछताछ का रिकॉर्ड और परिजनों को तत्काल सूचना देने को प्राथमिकता दी है। हर गतिविधि का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी विवाद की स्थिति में तथ्य स्पष्ट रह सकें।