पोखरण परमाणु परीक्षण – ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान’ का हुआ उद्घोष

गुलाब बत्रा, लेखक, वरिष्ठ पत्रकार

इस धरती पर आकर आपको क्या अनुभूति हुई? यह सवाल था तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से और इसका जवाब एक ऐतिहासिक उद्घोष के रूप में सामने आया।
यह प्रसंग 21 मई 1998 का है, जब राजस्थान के सीमांत जिले जैसलमेर स्थित पोखरण की प्रसिद्ध फील्ड फायरिंग रेंज पर प्रधानमंत्री वाजपेयी पहुंचे थे। वे परमाणु परीक्षण स्थल के गहरे गड्ढों का अवलोकन करते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। इससे दस दिन पहले 11 मई और फिर 13 मई को भारत ने क्रमश: दो और तीन भूमिगत परमाणु परीक्षण कर अमरीका सहित पूरे विश्व को चौंका दिया था।
इस घटनाक्रम के कवरेज के लिए जयपुर से गई प्रेस पार्टी में शामिल यूनीवार्ता (यूएनआइ) के प्रतिनिधि वाजपेयी जी से यह सवाल पूछा। सवाल सुनकर वे कुछ क्षण ठिठके। इसी बीच दिल्ली से आए प्रेस फोटोग्राफर उनकी प्रतिक्रिया कैद करने को तैयार थे। वाजपेयी जी ने अपने दाएं हाथ की उंगलियों से वी का निशान बनाया, जो कैमरों में कैद हो गया। कुछ क्षण के मौन के बाद उन्होंने आंखें मूंदी और फिर दृढ़ स्वर में कहा—
‘जय जवान, जय किसान’
और हाथ उठाकर जोड़ा—’जय विज्ञान’।
पोखरण की धरती से उठा यह नारा पहले सैनिक सम्मेलन और फिर जनसभा में गूंज उठा। यूनीवार्ता ने इस खबर को तुरंत फ्लैश कर दिया। यह पूरी कहानी भी बेहद रोचक है। 11 मई 1998 को भारत ने दो परमाणु परीक्षण किए और 13 मई को तीन और परीक्षण कर दुनिया में हलचल मचा दी। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी बलूचिस्तान में परमाणु परीक्षण किया।
अमरीका की खुफिया एजेंसी सीआइए भारत की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए थी। इसके लिए कई सैटेलाइट तैनात किए गए थे। इसके बावजूद भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने अत्यंत गोपनीयता और चतुराई से इस मिशन को सफल बनाया।
(गोपनीय ऑपरेशन की दिलचस्प कहानी)
परीक्षण से पहले 1997 में सेना की 58 इंजीनियर्स रेजिमेंट को तैनात किया गया। तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर कर्नल गोपाल टी. कौशिक ने मिशन को गुप्त रखने के लिए अनोखी रणनीति अपनाई। साइट पर क्रिकेट मैच आयोजित किए जाते थे, ताकि सैटेलाइट को यह सामान्य गतिविधि लगे। रंग-बिरंगे झंडों से सजा मैदान, दर्शकों की उपस्थिति—सब कुछ एक योजना का हिस्सा था। इसी आड़ में जवान बारी-बारी से साइट पर जाकर अपने कार्य को अंजाम देते थे। 1996 में बनी वाजपेयी सरकार ने परीक्षण की तैयारी शुरू की थी, लेकिन सरकार गिरने से काम रुक गया। 1998 में दोबारा सरकार बनने के बाद योजनाबद्ध तरीके से पांचों परीक्षण सफलतापूर्वक किए गए।
(इतिहास और पृष्ठभूमि)
भारत का पहला परमाणु परीक्षण 18 मई 1974 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में पोखरण में हुआ था। इसके बाद 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव ने भी परीक्षण की तैयारी की, लेकिन अमरीकी हस्तक्षेप (राष्ट्रपति बिल क्लिंटन) के कारण इसे रोकना पड़ा। बाद में वाजपेयी सरकार ने अत्यंत गोपनीय तरीके से परीक्षण कर भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देशों की श्रेणी में स्थापित कर दिया।
पोखरण-2 की सफलता के उपलक्ष्य में भारत सरकार ने 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस घोषित किया। इस मिशन में ‘मिसाइल मैन’ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।