निगहबान- जोधपुर की अभिव्यक्ति की उड़ान को आर्ट गैलरी की तलाश

जोधपुर। जोधपुर एक जीवंत सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। यहां लोककला, लघुचित्र शैली, समकालीन पेंटिंग, मूर्तिकला, फोटोग्राफी और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा रही है। पर विडंबना यह है कि कला-संवेदना से परिपूर्ण इस शहर में कलाकारों के लिए समर्पित और व्यवस्थित आर्ट गैलरियों का अभाव आज भी बना हुआ है। इसके बिना विकास के सारे दावे अधूरे हैं। जिस शहर समाज में कलाकार को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता वहां कि सभ्यता और सांस्कृति शनै: शनै: नष्ट हो जाती है। आज हालात यह हो गए हैं कि ढोला मारू, रागमाला, बारहमासा चित्र, कृष्ण लीला, पिछवाई, पाबूजी की फड़ और देवनारायण फड जैसी लोक चित्रकला शैलियां के कलाकारों के पास अपने चित्रों को प्रदर्शित करने का जोधपुर में कोई उचित मंच ही नहीं है।

शहर में अनेक प्रतिभाशाली कलाकार निरंतर सृजन कर रहे हैं, पर उसकी अभिव्यक्ति को कैनवास नहीं मिल रहा है। जोधपुर पश्चिमी राजस्थान का सांस्कृतिक केंद्र है। राजस्थान और देश की कला परंपरा को समृद्ध करने में हमारा बहुत बड़ा योगदान है। आज भी नई पीढ़ी के कलाकार अपने प्रयोगों से अलग पहचान बना रहे हैं, लेकिन प्रश्न यह है कि ये कलाकार अपनी कृतियों को प्रदर्शित कहां करें? जब शहर में स्थायी प्रदर्शन स्थलों का अभाव हो, तो कला घरों की दीवारों, निजी स्टूडियो और सीमित आयोजनों तक सिमटकर रह जाती है।

कला का अर्थ केवल सृजन करना नहीं

कला का अर्थ केवल सृजन करना नहीं, बल्कि समाज से संवाद स्थापित करना भी है। एक कलाकार अपनी कृति के माध्यम से समय, समाज, संवेदना और विचारों को अभिव्यक्ति देता है। यदि उसकी कला दर्शकों तक पहुंचे ही नहीं, तो वह संवाद अधूरा रह जाता है। यह केवल कलाकार की व्यक्तिगत हानि नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक ऊर्जा का भी क्षरण है।

पिछले लंबे समय से टाउन हॉल बंद

जोधपुर जैसे पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर में यदि स्थानीय कलाकारों को मंच नहीं मिलेगा, तो उनकी प्रतिभा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक तक कैसे पहुंचेगी? जो कलाकार अपने ही शहर में प्रदर्शन का अवसर न पा सके, उसके लिए व्यापक पहचान अर्जित करना और भी कठिन हो जाता है।

यह स्थिति केवल कला-जगत की समस्या नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विकास की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है। कहने को मारवाड इंटरनेशनल सेंटर के गलियारों को आर्ट गैलरी का दर्जा दिया हुआ है। शहर के टाउन हॉल में भी आर्ट गैलरी बनाई गई है, लेकिन पिछले लंबे समय से टाउन हॉल ही बंद पड़ा है। सूचना केन्द्र स्थित आर्ट गैलरी लंबे समय से बंद पड़ी है। यहां पर पाक विस्थापितों के पुनर्वास के लिए सरकारी कार्यालय संचालित हो रहा है।

आज आवश्यकता है कि प्रशासन, पर्यटन विभाग, नगर निगम और निजी संस्थाएं मिलकर इस दिशा में ठोस पहल करें। शहर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त सार्वजनिक आर्ट गैलरी, नियमित कला प्रदर्शनियां, ओपन आर्ट स्पेस और वार्षिक कला महोत्सव की शुरुआत की जानी चाहिए। इससे न केवल कलाकारों को मंच मिलेगा, बल्कि जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान भी और अधिक समृद्ध होगी। यह ध्यान रहे कि कलाकारों की आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं होती है। इसलिए सरकार को पहल करते हुए हर वर्ष कलाकारों को अभिव्यक्ति के लिए नि:शुल्क गैलेरी उपलब्ध करानी चाहिए।

जोधपुर की कला में वैश्विक स्तर पर पहुंचने की क्षमता है, लेकिन हर प्रतिभा को उड़ान के लिए आकाश चाहिए। यदि हम कलाकारों को मंच ही नहीं देंगे, तो उनकी कल्पनाएं कैनवास तक सीमित रह जाएंगी और शहर एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संभावना खो देगा। अब समय है कि जोधपुर कला को केवल विरासत के रूप में नहीं, भविष्य के निवेश के रूप में भी देखे।
sandeep.purohit@in.patrika.com