धौलपुर.शहर में नाला सफाई के नाम पर एक बार फिर खानापूर्ति की जा रही है। संवेदक के कर्मी जेसीबी से नालों की सफाई कर रहे हैं। जो नाले से कहीं तो गंदगी निकाल रहे हैं, लेकिन कहीं गंदगी नाले में ही जमा छोड़ी जा रही है। गत बुधवार को स्टेशन रोड के नालों की सफाई के दौरान बड़ी फील्ड की 50 मीटर तक दीवार तक को तोड़ डाला, जबकि वहां सफाई भी ठीक से नहीं की गर्ई।शहर की जलनिकासी अपंग होने के कारण पिछले तीन सालों से शहरवासी जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। रही सही कसर करोड़ों रुपए लेकर शहर के नालों की सफाई करने वाले संवेदक पूरी कर रहे हैं। जो अभी तक हर साल नाला सफाई के नाम पर करोड़ों डंकार चुके हैं, लेकिन शहर के नालों की सूरत नहीं बदल सकी। नगर परिषद ने इस सीजन मानसून को देखते हुए समय से पहले नाला सफाई को लेकर टेंडर जारी कर दिए। चार जोनों के 35 नालों की सफाई का ठेका एक ही संवेदक को 01 करोड़ 99 लाख 857 रुपए में दिया गया और अपे्रल माह में वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया गया। जिसके बाद संवेदक ने शहर के नालों की सफाई का कार्य आरंभ कर दिया। लेकिन अभी तक जहां-जहां नालों की सफाई का कार्य किया जा रहा है वहां पर सिर्फ पुनरावृत्ति यानी खानापूर्ति ही की जा रही है। अभी तक राजाखेड़ा बाइपास, सैंपऊ रोड, स्टेशन रोड, तलैया सहित अन्य जगह नालों की सफाई की गई, लेकिन अधिकतर जगह नालों में अब भी गंदगी भरी पड़ी है। सैंपऊ रोड के रहवासियों ने बताया कि सफाई कमिर्यों ने जेसीबी से नालों की सफाई की जिससे आधी गंदगी नालों में ही पड़ी है। तो कई जगह से गंदगी को निकाला ही नहीं। जिससे नाले अब भी चौक हो रहे हैं।
अतिक्रमण नहीं तोड़े फील्ड की दीवार तोड़ दी
बुधवार को संवेदक के कर्मियों ने स्टेशन रोड नाले की सफाई की। नाले की सफाई जेसीबी से ही की गई। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि नाला की सफाई के दौरान बड़ी फील्ड की 50 मीटर पक्की दीवार को संवेदक की सफाई कर्मियों ने तोड़ डाला, क्योंकि नाले की सफाई के लिए उन्हें नाले में न उतरना पड़े और सफाई जेसीबी से हो सके, लेकिन उसके बाद भी नाले की सफाई भी आधी अधूरी की गई। जबकि जहां नालों पर अतिक्रमण हो रहा था उनको नाला सफाई के लिए नहीं तोड़ा गया, बल्कि उन्हें ऐसा ही छोड़ दिया और नीचे नालों में गंदगी जमा हो रही थी। दुकानदारों ने बुलाकर नालों की स्थिति को बताया जो गंदगी से चौक हो रहे थे।
हर साल होती नाला सफाई के नाम पर लूट
शहर के नालों की सफाई पर नगर परिषद हर वर्ष लाखों रुपए खर्च करती आ रही है। लेकिन अभी तक सफाई के नाम पर संवेदक खानापूर्ति करते ही आ रहे हैं। और यही कारण रहा है कि शहर में जलभराव की स्थिति यथावत बनी हुई है। नालों की सफाई न करने को लेकर गत वर्ष परिषद ने ऐसे ही एक संवेदक और उसकी फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया था, लेकिन उसके बाद भी नालों की सफाई के नाम पर लीपापोती की जा रही है। हां गत वर्ष जरूर नाला सफाई का असर शहर में देखने को मिला था। तब एसडीएम साधना शर्मा ने भी नाला सफाई के दौरान निरीक्षण कर नालों की स्थिति को देखा था।
चार जोनों की 35 नालों की सफाई
शहर की जल निकासी चार जोनों कोठी, शहरी, जिरौली और गुलाब बाग क्षेत्र में बंटी है। इन क्षेत्रों में छोटे-बड़े 35 नाले आते हैं। इन नालों की सफाई का ठेका इस बार एक ही संवेदक को दिया गया है यह ठेका 01 करोड़ 99 लाख 857 रुपए का है। जिनमें सबसे दुर्गम कोठी क्षेत्र के 16 नालों की सफाई 40, 02896.19, शहरी क्षेत्र के 8 नालों की सफाई 20, 97012.66, जिरौली क्षेत्र के 4 नालों की सफाई 12, 77401.10 और गुलाब बाग क्षेत्र के 7 नालों की सफाई 27, 22547.56 रुपए में जारी किया गया है।
जेसीबी से की जा रही नालों की सफाई
अमूमन देखा जाता है कि संवेदक बड़े नालों की सफाई जेसीबी के माध्यम से और छोटे नालों की सफाई कर्मचारियों के माध्यम से की जाती है। लेकिन अभी तक देखने में आ रहा है कि जेसीबी के माध्यम से ही नालों की सफाई की जा रही है। जिस कारण सफाई के दौरान आसपास की दीवालों सहित नाले भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर नालों की सफाई कैसी हो रही है…क्या हो रहा है इसको देखने वाला कोई नहीं। नगर परिषद भी सब देख कर अनजान बनी बैठी है।
नाले के सफाई कार्य चल रहा है। मैं आपको पूछकर ही बता पाऊंगा कि कहां-कहां नालों की सफाई की गई है। अगर नाले की सफाई ठीक से नहीं की जा रही और बड़ी फील्ड की दीवार तोड़ दी गई है तो मैं दिखवाता हूं।
-गोपाल शर्मा, नाला सफाई संवेदक
यह देखने में आ रहा है कि संवेदक एक जगह कुछ सफाई कर उसको ऐसा ही छोड़ रहा है। जिसको लेकर उसको पाबंद किया जाएगा और एक तरीके से सही नाला सफाई कराई जाएगी।
-गुमान सिंह सैनी, अधीक्षक अभियंता नगर परिषद