Rajasthan Police Action: राजस्थान में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन म्यूल हंटर के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डीग, भरतपुर, जयपुर और बारां में साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क पर शिकंजा कसा है। डीग पुलिस ने अकेले 103 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जबकि बारां में 7 आरोपियों को पकड़ा गया। जयपुर में होटल में छिपे ठगों पर दबिश के दौरान आरोपी खिड़की से कूदकर भागने लगे, जिसमें एक घायल होकर पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
अब तक 34 मामले दर्ज
डीग एसपी शरण गोपीनाथ ने बताया कि अभियान के तहत अब तक 34 मामले दर्ज किए गए हैं। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इन आरोपियों के खिलाफ करीब 4.80 करोड़ रुपए की साइबर ठगी से जुड़ी 156 शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 108 मोबाइल फोन, 158 सिम कार्ड, 20 एटीएम कार्ड, 18 बैंक पासबुक, 9 चेकबुक, एक थार गाड़ी और 2.32 लाख रुपए नकद जब्त किए हैं। साथ ही 1074 सिम कार्ड और 1056 मोबाइल आईएमईआई नंबर ब्लॉक कराए गए हैं।
चोरी के मोबाइल और फर्जी सिम
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी चोरी के मोबाइल और फर्जी सिम के जरिए लोगों को कॉल कर ठगी करते थे। आरोपी व्हाट्सएप कॉल, फर्जी नौकरी, पुराने सिक्कों की खरीद और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए लोगों को जाल में फंसाते थे। ठगी की रकम को तुरंत अलग.अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर ट्रेसिंग मुश्किल बना दी जाती थी।
बैंक खाते किराये पर लेकर उनमें साइबर ठगी की रकम जमा करवाते
उधर जयपुर के जालूपुरा थाना इलाके में स्थित एक होटल में पुलिस ने दबिश दी। इस दौरान कई आरोपी खिड़की से कूदकर फरार हो गए। घायल हुए मंडावर निवासी राजेंद्र कुमार बैरवा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। डीसीपी करण शर्मा के अनुसार आरोपी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के लोगों के बैंक खाते किराये पर लेकर उनमें साइबर ठगी की रकम जमा करवाते थे। कमरे से 19 मोबाइल और एक लैपटॉप बरामद किया गया है।
382 संदिग्ध बैंक खातों की जांच कर 67 लोगों के खिलाफ कार्रवाई
वहीं बारां पुलिस ने भी 382 संदिग्ध बैंक खातों की जांच कर 67 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम या ओटीपी किसी को उपलब्ध न कराएं, क्योंकि ऐसे मामलों में खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आते हैं।
क्या होता है म्यूल अकाउंट
म्यूल अकाउंट एक ऐसा बैंक खाता है, जिसका इस्तेमाल अपराधी साइबर ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध धन को ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। यह खाता किसी और के नाम पर होता है, लेकिन उसे नियंत्रित कोई अन्य करता है। इसमें खाताधारक अक्सर अनजान होता है और लालच में आकर अपना खाता अपराधियों को सौंप देता है, जिससे वह खुद कानूनी मुसीबत में फंस जाता है। अक्सर साइबर ठग मजदूरों और गरीबों को लालच देकर इस तरह का खाता उनके दस्तावेज से खुलवाते हैं और ठगी के लिए खुद यूज करते हैं।