थार की तपती रेत पर इन दिनों आस्था का एक अलग ही संसार सजा नजर आया। वैशाख माह की चौदस और वैशाखी पूर्णिमा पर वैशाखी तीर्थ में लगा दो दिवसीय मेला श्रद्धा, परंपरा और लोकविश्वास का जीवंत उत्सव बन गया। भीषण गर्मी के बावजूद दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने यह साबित कर दिया कि आस्था के आगे मौसम की कठोरता भी फीकी पड़ जाती है।
वैशाखी तीर्थ का पवित्र कुंड इस आस्था का केंद्र बना रहा, जहां श्रद्धालुओं ने स्नान कर आत्मिक शांति का अनुभव किया। इसके बाद करीब 700 वर्ष पुराने भूतेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन कर श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। संध्या ढलते ही पूरा वातावरण भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनियों से गूंज उठा, जो रातभर निरंतर चलता रहा। पूर्णिमा के अवसर पर महिलाओं ने व्रत रखकर दान-पुण्य किया और परंपरा के अनुरूप व्रत का समापन किया।
सामाजिक समरसता और लोकसंस्कृति का संगम
मेले में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता और लोकसंस्कृति का भी सुंदर संगम देखने को मिला। व्यवस्थाओं की दृष्टि से भी आयोजन सुदृढ़ रहा। पेयजल, छाया, चिकित्सा, बिजली, पार्किंग और विश्राम के लिए टेंट की समुचित व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने बिना किसी असुविधा के मेले का आनंद लिया। सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस बल ने पूरे आयोजन को अनुशासित बनाए रखा। संध्या आरती के समय ख्याला मठ के मठाधीश गुरु गोरखनाथ के सान्निध्य में भूतेश्वर महादेव की आरती और भंडारे ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।
मोहनगढ़. वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर क्षेत्र में आस्था और श्रद्धा का विशेष माहौल देखने को मिला। विभिन्न स्थानों पर मेले जैसा दृश्य रहा, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण पवित्र कुंडों में स्नान के लिए पहुंचे। सुबह से ही श्रद्धालु अलग-अलग साधनों से धार्मिक स्थलों की ओर रवाना हुए। कुंडों पर दिनभर भीड़ बनी रही और लोगों ने आस्था की डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं और बालिकाओं में विशेष उत्साह नजर आया। वैशाख माह में व्रत रखने वाली बालिकाओं ने भी पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान पूर्ण किए। दिनभर व्रत रखकर श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य किए और गायों को हरा चारा व गुड़ खिलाकर पुण्य अर्जित किया। क्षेत्र के कई श्रद्धालु कोलायत, पुष्कर और रामदेवरा सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर स्थित पवित्र कुंडों में स्नान के लिए पहुंचे। स्नान और पूजा के बाद शाम को श्रद्धालु अपने-अपने घरों को लौटे।वैशाख पूर्णिमा के साथ ही पूरे माह चलने वाले वैशाख स्नान का समापन हुआ। दिनभर क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और आस्था का वातावरण बना रहा, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। वैशाख पूर्णिमा के साथ ही पूरे माह चलने वाले वैशाख स्नान का समापन हुआ। दिन भर क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और आस्था का वातावरण बना रहा, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।