Panchayat Election: 5 साल में चुनाव जरूरी, लेकिन जमीनी हकीकत अलग; 8 राज्यों में पंचायत चुनाव में देरी क्यों?

जयपुर। संविधान में पंचायतों के हर पांच साल में चुनाव कराने की व्यवस्था लागू हुए आज 33 वर्ष पूरे हो गए हैं, लेकिन कई राज्यों में यह प्रावधान अब भी कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। केंद्र सरकार ने इसी वर्ष मार्च में लोकसभा में जानकारी दी कि देश के 8 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में पंचायत चुनाव समय पर नहीं हुए है। कई जगह तो चुनाव 4 से 5 साल पहले ही ड्यू हो चुके हैं।

राजस्थान में पंचायत चुनाव में देरी को लेकर कांग्रेस भले ही सत्तापक्ष पर हमलावर है लेकिन हकीकत यह है कि देरी वाले राज्यों में तीन कांग्रेस शासित प्रदेश शामिल हैं और राजस्थान सहित चार राज्यों में भाजपा की सरकार है। इनके अलावा डीएमके शासित तमिलनाडू राज्य भी इस सूची में शामिल है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि चुनाव में देरी का उसके ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से लेना-देना नहीं है।

यह भी संयोग

हर पांच साल में पंचायत चुनाव की अनिवार्यता व पंचायतों को अधिकार देने वाला 73वां संविधान संशोधन 1992 में पी वी नरसिंहराव के शासनकाल में पारित हुआ था। यह उन्हीं के शासन में 24 अप्रेल 1993 से लागू भी हो गया। इसी कारण हर वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। इस संविधान संशोधन की अनदेखी करने वालों में राजस्थान भी शामिल हैं, जहां के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास उनके निकट संबंधी हैं।

लोकसभा में केंद्र सरकार ने यह किया खुलासा: भाजपा शासित राज्य

गुजरातः 2023 से ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत व जिला पंचायत चुनाव लंबित। अब इसी माह चुनाव प्रस्तावित।
महाराष्ट्रः 2022 से ब्लॉक पंचायत व जिला पंचायत चुनाव लंबित। करीब 50 स्थानों पर जनवरी 2025 से चुनाव ड्यू।
मणिपुरः 2022 से ग्राम पंचायत व जिला पंचायत चुनाव लंबित। हाईकोर्ट ने अगस्त 2025 में छह माह में चुनाव कराने को कहा। बाद में कैबिनेट ने फरवरी 2026 में चुनाव कराने का निर्णय लिया।
राजस्थानः 2025 से ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत व जिला पंचायत चुनाव लंबित। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रेल तक चुनाव कराने के निर्देश दिए।

कांग्रेस शासित राज्य

हिमाचल प्रदेश: जनवरी 2026 से पंचायत व निकाय चुनाव लंबित। अब मई में चुनाव कराने की तैयारी।
कर्नाटकः ग्राम पंचायत चुनाव दिसंबर 2025 से लंबित, जबकि ब्लॉक व जिला पंचायत चुनाव 2021 से लंबित। हाईकोर्ट से पांच-छह माह का समय मांगा गया।
तेलंगाना: जुलाई 2024 से ब्लॉक व जिला पंचायत चुनाव लंबित। एक तिहाई पंचायतों के चुनाव दिसंबर 2025 में हुए।

अन्य दल

तमिलनाडुः 28 जिलों में जनवरी 2025 से चुनाव लंबित, जबकि 9 जिलों में अक्टूबर 2026 में चुनाव ड्यू होंगे।

केंद्र शासित प्रदेश

जम्मू और कश्मीरः जनवरी 2024 से ग्राम पंचायत व ब्लॉक पंचायत चुनाव। जिला पंचायतों का कार्यकाल भी फरवरी में पूरा हो चुका। मई में चुनाव की संभावना।
लद्दाखः जनवरी 2024 से ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत व जिला पंचायत चुनाव लंबित। यह जम्मू एवं कश्मीर राज्य से अलग हुआ था।
लक्षद्वीपः दिसंबर 2022 से ग्राम पंचायत व जिला पंचायत चुनाव लंबित।
पुडुचेरीः जुलाई 2011 के बाद ग्राम पंचायत व ब्लॉक पंचायत चुनाव नहीं हुए।

अब यूपी की बारी: 57,695 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मई में पूरा होगा। चुनाव के लिए मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है।

पंचायती राज से निकले राजस्थान के नेता

सीएम भजन लाल शर्मा, नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा, मंत्री जोराराम कुमावत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा, विधायक दीपचंद खैरिया, कालूराम मेघवाल, शत्रुघ्न गौतम व हरलाल सहारण पंचायती राज संस्थाओं में प्रतिनिधि रहे हैं।

चुनाव नहीं होना असंवैधानिक

मैं राज्य निर्वाचन आयुक्त रहा, इसलिए कह सकता पांच साल में चुनाव नहीं होना असंवैधानिक है। पंचायत राज तभी मजबूत हो सकता है, जब पंचायती राज संस्थाओं को कि स्टाफ व कार्य कराने की शक्ति दी जाएंगी। इन संस्थाओं के प्रतिनिधियों की मजबूती को विधानसभा के प्रतिनिधि अपने लिए चुनौती के रूप में देखते है।
-इंद्रजीत खन्ना, पूर्व मुख्य सचिव, राजस्थान (73-74वां संविधान संशोधन का ड्राफ्ट तैयार किया)