राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित पचपदरा रिफाइनरी की आग बुझ चुकी है, लेकिन उससे उठे सवालों की तपिश अब जयपुर से दिल्ली तक महसूस की जा रही है। 20 अप्रैल की उस काली दोपहर को क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में भड़की लपटों ने न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 21 अप्रैल का ड्रीम लोकार्पण समारोह निरस्त कराया, बल्कि ‘दुनिया की सबसे आधुनिक रिफाइनरी’ होने के दावों की भी पोल खोल दी। चार दिन बीत जाने के बाद भी सवाल जस का तस खड़ा है- आखिर इस महा-चूक का असली जिम्मेदार कौन है?
हाईटेक दावों की हवा निकली: कहाँ गया ‘ऑटोमेटिक अलार्म’?
पचपदरा रिफाइनरी में लगी भीषण आग (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)
रिफाइनरी प्रशासन और एचपीसीएल (HPCL) लगातार यह दावा करते रहे हैं कि यह देश की सबसे आधुनिक और हाईटेक रिफाइनरी है। दावा था कि यहाँ छोटी सी गड़बड़ी होने पर भी ‘ऑटोमेटिक अलार्म सिस्टम’ बज उठेंगे और सेंसर तुरंत सक्रिय हो जाएंगे।
बड़ा सवाल: अगर सिस्टम इतना ही हाईटेक था, तो आग ने विकराल रूप कैसे ले लिया?
सिस्टम फेलियर: क्या सेंसर खराब थे या उन्हें जानबूझकर निष्क्रिय किया गया था?
सुरक्षा में चूक: प्रधानमंत्री की सुरक्षा एजेंसियां अब इस पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं कि कहीं यह सिस्टम के साथ कोई ‘छेड़छाड़’ तो नहीं थी।
लोकार्पण से 20 घंटे पहले ही क्यों? साजिश की बू!
प्रधानमंत्री का कार्यक्रम तय होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे परिसर को अपने घेरे में ले लेती हैं। ऐसे में लोकार्पण से मात्र 20 घंटे पहले आग लगना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।
एंट्री रिकॉर्ड की जांच: प्रधानमंत्री का दौरा तय होने के बाद से रिफाइनरी में आने-जाने वाले हर व्यक्ति का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
सीसीटीवी फुटेज: अलग-अलग टीमें सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों के ड्यूटी रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही हैं।
मोबाइल पर पाबंदी: हादसे के बाद अब रिफाइनरी में बाहरी लोगों के प्रवेश और मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
लीपापोती बंद करे सरकार : सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल
MP Ummeda Ram Beniwal and PM Modi – File Pic
बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “इतने बड़े हादसे पर केवल पचपदरा थानाधिकारी को निलंबित करना महज एक खानापूर्ति है। क्या इतनी बड़ी घटना की जवाबदेही केवल एक पुलिस अफसर पर टिकी है? असली दोषियों और बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए लीपापोती क्यों की जा रही है?” उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा में ‘अक्षम्य लापरवाही’ करार दिया है।
जांच के घेरे में ये 5 मुख्य बिंदु:
NIA – File PIC
सुरक्षा एजेंसियां और गृह विभाग मुख्य रूप से इन पांच सवालों के जवाब तलाश रहे हैं:
क्या प्रधानमंत्री की सुरक्षा में वास्तव में ‘सेंध’ लगाई गई?
क्या जानबूझकर यूनिट का सिस्टम फेल किया गया?
क्या यह किसी बड़ी तकनीकी गड़बड़ी का नतीजा था या मानवीय त्रुटि?
लोकार्पण से ठीक पहले ही यह हादसा क्यों हुआ?
रिफाइनरी के सेफ्टी ऑडिट में किन मानकों की अनदेखी की गई?