जयपुर। प्रदेश के बीकानेर, अलवर, सीकर व हनुमानगढ़ जिलों के बाद अब जयपुर में लिपिक भर्ती-2013 में फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। जिला स्तर पर एडीएम की अध्यक्षता में बनी कमेटी की ओर से 65 लिपिकों के दस्तावेज में गड़बड़ी सामने आई है। इनको बर्खास्त करने की कार्रवाई शुरू हो गई है, इससे पहले जिला परिषद जयपुर के एसीईओ शेर सिंह लुहाड़िया ने इन सभी लिपिकों को जवाब पेश करने के लिए नोटिस जारी किए हैं।
कई जिलों में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अब पंचायती राज विभाग के शासन सचिव जोगाराम ने सभी जिलों के सीईओ को आदेश दिए हैं कि ऐसे सभी केस की जांच कर उन्हें नौकरी से हटाया जाए। अब तक कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों को भी चार्जशीट थमाने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
शासन सचिव ने यह भी पूछा है कि वर्ष 2017 व 2018 में कार्रवाई के आदेश हो गए थे, तो अब तक एक्शन क्यों नहीं लिया गया? जयपुर जिला परिषद में लिपिक भर्ती फर्जीवाड़े का एक केस सामने आने के बाद तत्कालीन जिला कलक्टर जितेंद्र सोनी ने सभी भर्ती लिपिकों के दस्तावेज की जांच तत्कालीन एडीएम कुंतल विश्नोई की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर कराई थी।
दस्तावेज में मिली भिन्नता
1198 पेज की रिपोर्ट सौंपी गई, जिसमें 65 लिपिकों के दस्तावेज विधि मान्य नहीं मिले, जिसमें 22 ऐसे हैं, जिनके कंप्यूटर प्रमाण पत्रों में भिन्नता है। 32 लिपिकों ने एक ही समय पर दो डिग्रियां ली हैं और 11 लिपिकों के पास ऑफ कैंपस स्टडी के प्रमाण पत्र मिले हैं। इन लिपिकों से जवाब मांगा गया है।
आरोप यह भी, जुगाड़ लगा रहे
जिन लिपिकों के दस्तावेज में खामियां मिली हैं। बर्खास्तगी के नोटिस जारी किए गए। इस पर अमल होता, इससे पहले ही जयपुर कलक्टर जितेंद्र सोनी का तबादला हो गया। आरोप है कि रसूखदार लिपिक नेताओं से लेकर बड़े लोगों की सिफारिशें करवा रहे हैं।
प्रदेश में ये मिले फर्जीवाड़े
लिपिक भर्ती 2013 के तहत सरकार ने वर्ष 2017 में लिपिकों के दस्तावेज सत्यापन कराने के आदेश दिए, तो अकेले बीकानेर में 49 लिपिकों के दस्तावेज विधि मान्य नहीं पाए गए। इन्हें बर्खास्त करना था, लेकिन नौकरी चल रही है।
जिला परिषद जयपुर में 7 केस पिछले वर्ष की शुरुआत में सामने आए, तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। उसके बाद तत्कालीन कलक्टर ने बाकी लिपिकों के दस्तावेजों की जांच कराई थी।
सीकर जिला परिषद की ओर से हाल ही में दो लिपिकों के अनुभव प्रमाण पत्र अमान्य पाए जाने पर नौकरी से बर्खास्त किया गया है।
अलवर जिले में वर्ष 2022 में 134 लिपिकों की भर्ती में सबसे ज्यादा गड़बड़ी सामने आई। इस भर्ती के तहत नियुक्त 3 लिपिक बर्खास्त हो चुके हैं। इनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। भर्ती शाखा का लिपिक भी निलंबित किया गया है। करीब 40 से ज्यादा लिपिकों के दस्तावेज में गड़बड़ी की शिकायत एसओजी को भेजी गई है। यहां नियुक्त 655 लिपिकों में से किसी का भी दस्तावेज सत्यापन नहीं कराया गया।
हनुमानगढ़ जिला परिषद की ओर से भी कुछ साल पहले लिपिक दस्तावेज में गड़बड़ी और अमान्य प्रमाण पत्र के आधार पर 2 लिपिक बर्खास्त किए गए थे।
एसओजी जांच क्यों नहीं?
लिपिक भर्ती में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा होने पर सरकार ने इसकी जांच एसओजी से कराने के लिए विधानसभा में कहा। मंत्री मदन दिलावर ने इसकी घोषणा की, लेकिन अब तक जांच एसओजी से कराने को लेकर कोई पत्र सामने नहीं आया।
‘जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित लिपिकों ने नोटिस के जवाब भेजे हैं, जो जांच कमेटी के समक्ष भेज दिए गए हैं। अब कमेटी जवाब के आधार पर आगे एक्शन लेगी।’ -शेर सिंह, एसीईओ, जिला परिषद जयपुर