MP में वायरस से आधा दर्जन बाघ की मौत के बाद हाई अलर्ट पर आया राजस्थान का वन विभाग, उच्च स्तर से निर्देश जारी

Deaths Of Tigers Due To Canine Distemper Virus: मध्यप्रदेश के जंगलों में केनाइन डिस्टेंपर वायरस के कारण हुई बाघों की संदेहास्पद मौतों के बाद राजस्थान का वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। वन्यजीवों के इस जानलेवा खतरे को देखते हुए वे टाइगर रिजर्व बूंदी स्थित देश के 52वें टाइगर रिजर्व रामगढ़ विषधारी में विशेष अलर्ट जारी किया गया है। वर्तमान में यहां 8 बाघ बाघिन मौजूद हैं, जिनमें से दो बाघिन आबादी क्षेत्र के आसपास मवेशियों को भी शिकार बना रही है।

जानकारी अनुसार टाइगर रिजर्व में इस वायरस से बचाव के लिए उच्च स्तर से निर्देश जारी कर सुरक्षा बढ़ाने की सलाह दी गई है। संभावित खतरे की आशंका को को देखते हुए वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। वन्यजीव प्रेमियों और वनकर्मियों की टीमें बाघों और बघेरों की चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है। रिजर्व में लगे सभी कैमरा ट्रैप्स के फुटेज की गहनता से जांच की जा रही है ताकि किसी भी बीमार वन्यजीव की पहचान तुरंत हो सके।

अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है टीका

एक तरफ केनाइन डिस्टेंपर वायरस फैलने से बाघ-बघेरों पर खतरा मंडरा रहा है वहीं बूंदी के पशु चिकित्सालय में इसका टीका ही उपलब्ध नहीं है। पालतू श्वान को तो पालक अपने खर्चे पर टीका लगवा रहे हैं, लेकिन सड़कों पर घुमने वाले श्वानों के टीकाकरण की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इस संबंध में गुरुवार को हुई जिला स्तरीय जन सुनवाई में भी यह मुद्दा उठाया गया, जिस पर जिला कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों स्थिति की गंभीरता को देखते हुए श्वानों के टीकाकरण की व्यवस्था के निर्देश दिए।

श्वानों से फैलता है संक्रमण

केनाइन डिस्टेंपर एक बेहद संक्रामक और घातक वायरल बीमारी है। ये आमतौर पर जंगलों के आसपास के गांवों में रहने वाले श्वानों से जंगली जानवरों विशेषकर बाघ, बघेरे और सियार में फैलती है। रामगढ़ विषधारी रिजर्व की सीमाएं कई ग्रामीण क्षेत्रों से सटी हुई हैं, जिससे यहां संक्रमण फैलने का जोखिम अधिक है। जिला प्रशासन अब वन विभाग के साथ मिलकर रिजर्व के कोर व बफर जोन से सटे गांवों में घरेलू और सड़कों पर साथ ही पानी के स्रोतों के आसपास गश्त बढ़ा दी गई है, क्योंकि संक्रमित घुमने वाले श्वानों के टीकाकरण की योजना पर भी विचार कर रहा है।

आमतौर पर संक्रमित कुत्तों से अन्य श्वानों या बिल्ली प्रजाति के वन्यजीवों में फैलने वाली इस बीमारी में संक्रमित पशु को तेज बुखार, आंखों और नाक से लगातार पानी बहना, सुस्ती, कमजोरी और खाना-पीना पूरी तरह छोड़ देना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर स्थिति में जानवर दिमागी संतुलन खोकर अपनी याददाश्त भूल जाता है और दौरे पड़ते हैं। जानवर अक्सर पानी के पास सुस्त पाए जाते हैं।

बूंदी में हो चुकी है पैंथर की मौत

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में गत वर्ष शहर के नजदीक रामपुरिया के पास इस बीमारी से ग्रसित एक पैंथर गंभीर हालत में रेस्क्यू किया गया था, जो अपनी याददाश्त खो चुका था। लोगों ने बीमार पैंथर के गले में पट्टा बांधकर उसके साथ सेल्फी भी ली थी। बाद में इलाज के दौरान उस पैंथर की मौत हो गई थी।

केनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघों व बघेरों के बचाव के लिए टाइगर रिजर्व के अंदर व आसपास के श्वानों का टीकाकरण होना चाहिए। संक्रमित श्वानों व वन्यजीवों को अलग कर देना चाहिए, ताकि अन्य जानवरों में यह वायरस नहीं फैले।
डॉ. मनीष सिंह चारण, पशु चिकित्सक एवं वन्यजीव एक्सपर्ट

एक केनाइन डिस्टेंपर बीमारी श्वान व बिल्ली प्रजाति के जानवरों में फैलती है और इससे अन्य जानवरों व मनुष्य में फैलने का खतरा नहीं है। श्वानों में माह के अंतराल में दो टीके लगाने से इस बीमारी का खतरा कम हो जाता है। बूंदी में में यह टीका सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।
नीलकमल सक्सेना, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, बूंदी डॉ.

केनाइन डिस्टेंपर वायरस टाइगर रिजर्व व बाघ-बघेरों तक नहीं फैले इसके लिए वन विभाग सतर्क है और श्वानों के टीकाकरण के लिए भी प्रयास कर रहे हैं।
आलोकनाथ गुप्ता, उपवन संरक्षक एवं उपक्षेत्र निदेशक, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, बूंदी