Ajmer Chana Procurement: केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए राजस्थान में चना खरीद अवधि 30 दिन बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। अब मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत चना खरीद 25 मई की बजाय 24 जून 2026 तक की जा सकेगी। इससे किसानों को उपज तुलाई के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा और खरीद केन्द्रों पर दबाव भी कम होगा। अजमेर जिले के किसानों को इसका सर्वाधिक लाभ मिलेगा।
अजमेर में बुवाई का आधा हिस्सा चने का
इस साल खरीद अवधि 30 दिन कम किए जाने से किसानों को कम समय में अधिक उपज बेचने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा था। राजस्थान पत्रिका ने किसानों की इस परेशानी को प्रमुखता से उठाया। विशेष रूप से अजमेर जिले में स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही थी, क्योंकि यहां रबी फसल की कुल बुवाई का करीब आधा हिस्सा चने के अधीन रहा। ऐसे में बंपर पैदावार की संभावना के बीच खरीद केन्द्रों पर भारी दबाव बनने की आशंका थी।
खरीद मात्रा पूर्व स्वीकृत ही रहेगी
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से 22 मई को जारी आदेश के अनुसार राजस्थान सरकार के अनुरोध पर चना खरीद अवधि बढ़ाने का निर्णय किया गया। हालांकि कुल खरीद मात्रा पूर्व स्वीकृत 5.53 लाख मीट्रिक टन से अधिक नहीं होगी। केंद्रीय नोडल एजेंसियां केवल पूर्व पंजीकृत किसानों से ही एफएक्यू गुणवत्ता का चना खरीदेंगी।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 25 फरवरी को राजस्थान में रबी 2026 सीजन के लिए 5.53 लाख मीट्रिक टन चना खरीद को मंजूरी दी थी। सरकार ने इस वर्ष चने का समर्थन मूल्य 5,875 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
राजस्थान पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
राजस्थान पत्रिका ने 25 अप्रेल के अंक में ‘एमएसपी का गणित : 90-60=किसानों के लिए चुनौती’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें रबी विपणन सीजन 2026-27 में सरकार की ओर से एमएसपी पर चने की खरीद के 30 दिन घटाए जाने और समय सीमा घटाने से किसानों पर कम समय में चने की उपज की तुलाई को लेकर दबाव आने की जानकारी दी गई। इसके बाद ‘खरीद केन्द्रों के बाहर ट्रैक्टरों की कतार, खरीद अवधि बढ़ाए सरकार’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया। अब सरकार की ओर से खरीद अवधि बढ़ाए जाने से किसानों को राहत नसीब हो सकेगी।
इनका कहना है…
एमएसपी पर चना खरीद अवधि को 60 से 90 दिन करने से किसानों को राहत मिलेगी, हालांकि सरकार को समर्थन मूल्य पर खरीद सालभर करनी चाहिए। किसानों के हित में मुद्दा उठाने के लिए राजस्थान पत्रिका का आभार।
-रामपाल जाट, राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान महापंचायत