उदयपुर। सभ्यता इतनी तेजी से बदल रही है कि शब्दों के अर्थ और जीवन के उद्देश्य भी बदलते जा रहे हैं। हम शब्द तो रट लेते हैं, लेकिन किसी भी कर्म के पीछे की मंशा और नीयत को समझना जरूरी है। कुलिशजी के जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व को समझते हुए यही महसूस होता है कि पत्रकारिता केवल खबर छापने का काम नहीं है। हर परिणाम के पीछे एक नीयत होती है और उसी नीयत का नाम पत्रकारिता है। पत्रकारिता को शब्दों से नहीं, नीयत से समझना होगा। यह बात पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने गुरुवार को जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय में कर्पूरचन्द्र कुलिश शोध संस्थान के शुभारंभ समारोह में कही।
आयोजन विश्वविद्यालय के प्रतापनगर स्थित परिसर में हुआ। समारोह से पहले कुलपति सचिवालय में शोध संस्थान कक्ष का उद्घाटन कोठारी परिवार के सदस्यों ने किया। आइटी सभागार में आयोजित समारोह में शहर के प्रबुद्धजन, विद्यापीठ विवि के पदाधिकारी मौजूद थे।
सरोकार: धरती और समाज का ऋण चुकाना
कोठारी ने कहा कि समाज और शिक्षा को भी जीवन की भूमिकाओं के अनुसार समझना होगा। संस्कृति कभी नहीं बदलती, उसकी रक्षा मां करती है। सांस्कृतिक मूल्य जीवित हैं तो मनुष्य हर बदलाव के बीच भी अच्छा इंसान बना रह सकता है। हमें सीखना होगा कि धरती और समाज का ऋण कैसे चुकाना है। पत्रिका के सरोकार इसी भावना से जुड़े रहे हैं। अमृतम् जलं अभियान के तहत यदि कोई तालाब की खुदाई करता है तो वह केवल मिट्टी नहीं निकाल रहा होता, बल्कि अपनी धरती और गांव से जुड़ रहा होता है।
शुरुआत एक कक्ष की नहीं, बल्कि विचारों की
कुलपति कर्नल प्रो. एसएस सारंगदेवोत ने कुलिशजी की जीवनी पर प्रकाश डाला। उनके जीवन संघर्ष, पत्रिका की शुरुआत तक, लेखन से लेकर यात्राओं तक की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शोध संस्थान महज एक कक्ष का उद्घाटन नहीं, बल्कि विचार, संकल्प और भविष्य की संभावनाओं की शुरुआत है।
शोध व अध्ययन को मिलेगा प्रोत्साहन
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति भंवरलाल गुर्जर ने बताया कि शोध संस्थान के माध्यम से कुलिशजी के जीवन, विचारों, लेखन एवं पत्रकारिता के सिद्धांतों पर शोध एवं अकादमिक अध्ययन को प्रोत्साहित किया जाएगा। यहां पत्रकारिता अध्ययन व सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर व्याख्यानमाला व कार्यशालाएं होंगी।