बाड़मेर। जिले के राणीगांव क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां तीन दिन पहले गिरे ओले तेज गर्मी के बावजूद नहीं पिघले। इलाके में तापमान करीब 45 डिग्री तक पहुंच रहा है, लेकिन इसके बाद भी खेत में पड़े ओले वैसे ही नजर आए। आमतौर पर कुछ मिनटों में पिघल जाने वाले ओलों का तीन दिन तक सुरक्षित रहना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
तीन दिन पहले हुई थी ओलावृष्टि
यह मामला राणीगांव के सेजोणी मेघवालों की ढाणी स्थित एक खेत का है। ग्रामीणों के अनुसार तीन दिन पहले यहां बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई थी। इसके बाद खेत में कई जगह ओले गिरे थे। जब परिवार के लोग तीन दिन बाद खेत पहुंचे तो वहां कुछ ओले अब भी जमे हुए मिले। यह देखकर सभी हैरान रह गए।
ओले देखने पहुंच रहे ग्रामीण
ग्रामीण रामजी ने बताया कि उन्होंने अपनी 70 साल की उम्र में पहली बार ऐसा नजारा देखा है। उनका कहना है कि इतनी तेज गर्मी में भी ओलों का नहीं पिघलना किसी अचरज से कम नहीं है। गांव के अन्य लोग भी खेत में पहुंचकर इस अनोखी स्थिति को देखने लगे।
घास-फूस के नीचे दबे हैं ओले
ग्रामीणों के अनुसार खेत में जहां बाजरे की फसल काटने के बाद बचा घास-फूस पड़ा था, उसी के नीचे ओले दबे हुए थे। स्थानीय भाषा में इस घास-फूस को डूर कहा जाता है। जिन जगहों पर यह डूर नहीं था, वहां गिरे सभी ओले पहले ही पिघल चुके थे। केवल डूर के नीचे दबे ओले ही सुरक्षित रहे।
ग्रामीण ने बताई वजह
ग्रामीण कमलसिंह राणीगांव ने बताया कि बाजरा निकालने के बाद बचने वाले चारे को डूर और डोको कहा जाता है। इसकी तासीर ऐसी होती है कि इसके नीचे रखी ठंडी चीज जल्दी नहीं पिघलती। उनका कहना है कि यह चारा एक तरह से आइसबॉक्स जैसा काम करता है। इसी कारण ओले तीन दिन बाद भी नहीं पिघले। इस अनोखी घटना को देखने के लिए आसपास के लोग भी खेत पहुंच रहे हैं। गांव में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग मोबाइल से वीडियो और फोटो बनाकर सोशल मीडिया पर भी साझा कर रहे हैं।