एडवाइजरी: ट्रस्ट वॉलेट यूजर्स को निशाना बना रहे ठग, पी2पी प्लेटफॉर्म से मैसेजिंग एप तक बिछा रहे जाल
उदयपुर. बढ़ते साइबर क्राइम के बीच क्रिप्टो करेंसी यूजर्स ठगों के निशाने पर हैं। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) और नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (एनसीटीएयू) ने ट्रस्ट वॉलेट यूजर्स को टारगेट करने वाले स्कैम को लेकर अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है।एडवाइजरी में नागरिकों से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे अपने क्रिप्टो वॉलेट को किसी भी अनजान या संदिग्ध वेबसाइट से न जोड़ें। इसके अलावा, सीड फ्रेज (बिटकॉइन वॉलेट पासवर्ड सेट करने और बैकअप लेने के लिए उपयोगी) और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा करने से बचें। किसी भी लिंक या वेबसाइट पर जाने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांच लें।
ऐसे होती है फ्रॉड की शुरूआत
स्कैमर्स सबसे पहले यूजर्स से पी2पी (पीयर-टू-पीयर) प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से संपर्क करते हैं।- भरोसा जीतकर वॉट्सएप या टेलीग्राम पर शिफ्ट करते हैं, इससे ट्रैक करना मुश्किल होता है।
– इसके बाद बातचीत बढ़ाते हुए यूजर्स को फर्जी वेरिफिकेशन वेबसाइट्स पर लाया जाता है।
– इन वेबसाइट्स पर यूजर्स से क्रिप्टो वॉलेट कनेक्ट करने व परमिशन अप्रूव के लिए कहते हैं।- जैसे ही यूजर परमिशन को स्वीकार करता है, हमलावरों को वॉलेट का एक्सेस मिल जाता है।
– इसके बाद वे बिना किसी अतिरिक्त इंटरेक्शन के वॉलेट से फंड ट्रांसफर कर लिया जाता है।- इस तरह एक बार पैसा ट्रांसफर हो जाने के बाद उसे वापस पाना लगभग असंभव हो जाता है।
ऐसे पहचानें फर्जी वेबसाइट
फर्जी वेबसाइट्स असली जैसी दिखती है, लेकिन उनके यूआरएल में मामूली बदलाव होता है। एचटीटीपीएस और लॉक आइकन की जांच करें। गलत स्पेलिंग, अनजान डोमेन और जल्दी-जल्दी निर्णय लेने का दबाव भी खतरा है।
बचने के आसान उपाय
मजबूत पासवर्ड रखें और दो-स्तरीय सुरक्षा (2एफए) चालू करें। अनजान लिंक या ऐप डाउनलोड न करें। पब्लिक वाई-फाई पर वित्तीय ट्रांजेक्शन से बचें। नियमित रूप से वॉलेट और एप अपडेट करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत रिपोर्ट करें और सतर्क रहकर ही डिजिटल लेनदेन करें।
टॉपिक एक्सपर्ट
यदि किसी वॉलेट से कोई संदिग्ध एप जुड़ा दिखाई दे तो उसे तुरंत डिस्कनेक्ट कर देना चाहिए। किसी भी तरह के साइबर फ्रॉड या क्रिप्टो ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन नम्बर पर संपर्क करने या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना चाहिए। साइबर एजेंसियों ने अपील की है कि वे लालच या जल्दबाजी में कोई भी निर्णय न लें और डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें।
राजकुमार जाखड़, साइबर एक्सपर्ट कांस्टेबल, उदयपुर