दो करोड़ पेंसठ लाख का ठेका…काम कहां हो रहा पता नहीं

-टेण्डर के एक साल बाद भी शहर के अधिकतर चैम्बर चौक, बह रहा पानी

-संवेदक और न ही नगर परिषद सफाई व्यवस्था को लेकर दिख रहे तत्पर

धौलपुर. दो करोड़ 65 लाख का सीवर सफाई का ठेका देने के बाद भी शहर के चैम्बरों की हालत खराब है। गर्मी के दिनों में भी कई क्षेत्रों में चैम्बर गंदगी उगल रहे हैं, ना संवेदक और ना ही नगर परिषद चैम्बरों की सफाई को लेकर तत्पर दिख रहे हैं। सफाई के नाम पर कुछ जगह खानापूर्ति जरूर की गई, लेकिन समस्या जस की तस ही बनी हुई है। जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि इस मानसून सीजन भी लोगों को जलभराव की समस्या से दो चार होना पड़ सकता है।

पिछले दो सालों से शहर की 30 से 40 कॉलोनियां जलभराव से जूझ रही हैं। जिसका मुख्य कारण शहर की जलनिकासी का सुदृढ़ न होना है। एक ओर जहां नहरों पर प्लॉटिंग काट कालोनियां बस गई हैं, तो वहीं सालों से नालों और चेम्बरों की सफाई नहीं होने से हालात और बिगड़ गए। नतीता 50 से 60 हजार लोगों जान मानसून के समय सांसत में बनी रही। जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार एनजीटी तक के हस्तक्षेप के बाद शहर की जलनिकासी को बेहतर बनाने परिषद ने क्रिया कलाप प्रारंभ किए। जिसके बाद गत वर्ष शहर के नालों की सफाई का ठेका के साथ सीवरों की सफाई का भी ठेका दिया गया था। यह ठेका सीवर 171 किमी लंबी लाइन के मेंटेनेंस और सफाई के लिए 2 करोड़ 83 लाख रुपए में दिया गया था।

हालांकि ठेकेदार इस राशि में से 22 प्रतिशत कम राशि में ही काम कर रहा है। जिस कारण यह ठेका 2 करोड़ 65 लाख का दिया गया था। यह ठेका ठेकेदार बृजेश बेदी को तीन सालों के लिए दिया गया है। परिषद ने जिसके वर्क ओर्डर 16 जून को जारी किए थे। वर्क ऑर्डर जारी हुए एक साल होने वाला है, लेकिन शहर के चैम्बरों की हालत जस की तस बनी हुई है। अभी तक ना ही चैम्बरों के पानी की प्रॉपर जलनिकासी की व्यवस्था की गई और न ही चैम्बरों की सफाई की जा रही है। यही कारण है कि शहर के कई क्षेत्रों में अभी भी चैम्बार उफान मार रहे हैं।

एक साल बाद भी अधिकांश सीवरेज चौक

लगभग एक साल पहले हुए 2.65 करोड़ का सीवर ठेका के बावजूद अभी तक अधिकांश सीवरेज चौक हैं। जिनसे कई कॉलोनियां प्रभावित हो रही हैं। हालांकि अभी गर्मी का समय होने के कारण जलभराव से कुछ राहत जरूर है, लेकिन सीवरों की सफाई न होने के कारण मानसून में हालात फिर बिगड़ सकते हैं। सीवरेज चैंबरों की सफाई न होना नगर परिषद और संवदेक की गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार को दर्शाता है। शहर के सैंपऊ, बाड़ी और ओडेला रोड सहित कई कॉलोनियों में सीवरेज जाम की स्थिति बनी हुई है। निहालगंज इंदिरा रसोई के मुख्य द्वार पर सीवरेज का गंदा पर बदस्तूर सालों से बह रहा है। जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

171 किमी बिछी शहर में सीवर लाइन

देखा जाए तो शहर की सीवर लाइन का नेटवर्क भी एक बड़ी समस्या है। शहर में 171 किमी सीवर लाइन का नेटवर्क बिछा हुआ है। यह सीवर लाइन तब बिछाई गईं थी, तब शहर की आबादी मौजूदा आबादी से 40 प्रतिशत कम थी। आबादी कम होने की वजह से उस समय जहां इनमें छोटे पाइपों का उपयोग किया गया था तो वहीं सीवर लाइन में अध्यधिक मोड़ भी दे दिए गए थे। शहर की आबादी बढऩे के साथ इन चेम्बरों पर भी बोझ बढऩे लगा। सालों परिषद की बेरुखी के कारण यह चेम्बर धीरे-धीरे चौक हो गए। हालांकि परिषद ने शहर में नई सीवरेज लाइन की डीपीआर बनाकर भी सरकार को भेजा था, लेकिन अभी तक उस पर कोई निर्णय नहीं हो सका।

परिषद ने ली गत वर्ष की गलती से सीख

परिषद ने गत वर्ष की गलतियों से सीख लेते हुए इस वर्ष शहर के चार जोनों (शहर, जिरौली, कोठी क्षेत्र और गुलाब बाग) के नालों की सफाई की टेण्डर प्रक्रिया गत माह कर वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया गया है। जिसके बाद संवेदक ने भी शहर के नालों की सफाई कार्य भी प्रारंभ कर दिया है। गत वर्ष परिषद ने टेण्डर के बाद वर्क ऑर्डर जारी करने में ही एक माह का समय लगा दिया था। जिस कारण मानूसन से पहले नालों की सफाई के लिए अतिरिक्त समय नहीं मिल सका था, लेकिन इस सीजन मानसून में अभी 50 दिन का समय शेष है। तब तक परिषद शहर के सभी छोटे और बड़े नालों की सफाई का अनुमान लगा रहा है।

शहर के चैम्बरों की सफाई की जा रही है। होने वाले जलभराव से बहुत राहत है। अभी जिन क्षेत्रों में सफाई नहीं हुई है तो वहां भी सफाई कराई जाएगी।

-गुमान सिंह सैनी, अधीक्षण अभियंता नगर परिषद