तालेड़ा. राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर क्षेत्र के 2 दर्जन से अधिक गांवों के लोग इलाज कराने आते हे। अस्पताल का रोजाना 500 से 600 मरीजों का स्वास्थ्य जांच के लिए है।राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 12 चिकित्सा अधिकारी का पदस्थापन है, लेकिन प्रतिनियुक्तियां लेकर कई चिकित्सा अधिकारी व नर्सिंग कर्मचारी सुविधाजनक स्थान पर प्रतिनियुक्ति करवा लेने से अस्पताल में चिकित्सा अधिकारियों एवं विशेषक की कमी की समस्या उत्पन्न हो गई है। जिससे मरीजों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए सभी स्वास्थ्य संबंधी उपकरण मशीन मौजूद है, लेकिन उनको संचालित करने के लिए कोई स्वास्थ्य कर्मचारी व स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद नहीं है। कोटा बूंदी के बीच तालेड़ा अस्पताल राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर स्थित हैं।राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वर्तमान में केवल 4 चिकित्सा अधिकारी कार्यरत है। अन्य चिकित्सा अधिकारियों का पदस्थापन खाली चल रहा है। चिकित्सा अधिकारियों को रात और दिन की अलग-अलग ड्यूटी करनी पड़ती है।
ये हैं चिकित्सक एवं नर्सिंग कर्मचारी प्रति नियुक्ति पर
राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वर्तमान में चार चिकित्सक ही कार्यरत चल रहे हैं, जिसमें से 5 पद चिकित्सक के रिक्त चल रहे है।डॉ प्रतुल गुप्ता शिशु रोग विशेषज्ञ को जोन डायरेक्टर के आदेश पर कोटा में लगा रखा है। डॉ नीतू मीणा सीनियर रेजिडेंट का कोर्स कर रही है, वह कोटा मेडिकल कॉलेज में कार्य कर रही हैं। हबीब मंसूरी सीनियर लैब टेक्नीशियन दो साल से फूड डिपार्टमेंट में लगा रखा है। सीएमएचओ के आदेश से प्रतिनियुक्ति पर चल रहे हैं।
कृष्णा पाराशर नर्सिंग ऑफिसर स्वास्थ्य केंद्र बालचंद पाड़ा बूंदी में है।भरत शर्मा नर्सिंग ऑफिसर से पीएमओ बूंदी में सीएमएचओ के आदेश पर प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है।राजेंद्र कुमार शर्मा सीनियर नर्सिंग ऑफिसर सीएमएचओ के आदेश पर से पीएमओ बूंदी में लगाया है।सोनू कुमारी रैगर राजकीय स्वास्थ्य केंद्र रजत गृह बूंदी में सीएमएचओ के आदेश पर कार्यरत है।महेश लैब टेक्नीशियन को सीएमएचओ झालावाड़ के अधीन जोन डायरेक्टर के आदेश से लगाया हुआ है।अस्पताल में 5 चिकित्सा अधिकारियों का पद स्थापन खाली चल रहा है।
वहीं नर्सिंग कर्मचारी को एक साल से बूंदी प्रतिनियुक्ति पर लगाया हुआ है। ऐसी स्थिति में मरीज को कोटा बूंदी जाकर इलाज करना मजबूरी बन चुकी है, जिसमें मरीज की जान को जोखिम एवं भाग दौड़ अधिक होने से स्वास्थ्य, दबाव पर भी प्रभाव पड़ता है।
अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन विशेषज्ञ, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित कई चिकित्सा अधिकारियों की कमी चल रही है।
पद रिक्त होने से मरीजों को परेशानी होती है। अस्पताल में चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेज कर दी जा चुकी है।
डॉ.लक्ष्मी वर्मा, प्रभारी, राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तालेड़ा