लाखों खर्च कर निकाली खरपतवार फिर तालाब में सड़ने को छोड़ी

स्वरूप सागर और कुम्हारिया तालाब में महीनों से तैर रही जलीय वनस्पति, जल प्रदूषण और मच्छरों का खतरा बढ़ा, नगर निगम की लापरवाही उजागर

उदयपुर. शहर की झीलों को साफ रखने के नाम पर लाखों रुपए खर्च कर जलीय खरपतवार निकालने के बावजूद नगर निगम की लापरवाही सामने आई है। निकाली गई खरपतवार को तालाबों के किनारे और पानी में ही छोड़ दिया गया, इससे अब वही वनस्पति सड़-गलकर जल को दूषित कर रही है। नगर निगम ने लाखों रुपए खर्च कर झील की सफाई तो करवाई, लेकिन उसके बाद उचित निस्तारण नहीं किया गया। परिणामस्वरूप यह जलीय वनस्पति सड़-गलकर पानी को प्रदूषित कर रही है और हानिकारक कीटों के पनपने का कारण बन रही है।

करीब छह माह पहले डिवीडिंग मशीन से स्वरूप सागर तालाब से जलीय खरपतवार निकाली गई थी, लेकिन उसे आज तक तालाब पेटे में ही छोड़ दिया गया है। इसी तरह जनवरी माह में कुम्हारिया तालाब से निकाली गई खरपतवार भी अब तक पानी में तैर रही है। रिंग रोड क्षेत्र में भी जलस्तर बढ़ने के कारण यही स्थिति बनी हुई है, जहां पानी की सतह पर खरपतवार तैरती नजर आ रही है। इससे न केवल झीलों की प्राकृतिक पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है, बल्कि पानी की भराव क्षमता भी घट रही है।

झीलों से निकाली गई जलीय खरपतवार का उचित निस्तारण किया जाए। इसे जैविक खाद में बदलकर नगर निगम की गार्डन और नर्सरी में उपयोग किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग भी हो सके।

तेज शंकर पालीवाल, पूर्व झील विकास प्राधिकरण सदस्य