श्रीमहावीरजी। ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर एक ओर जहां सरकार इसे विकास का बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर भूमि अधिग्रहण से प्रभावित ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने तहसीलदार हरसहाय मीना को ज्ञापन सौंपकर मुआवजे में बढ़ोतरी और मूलभूत सुविधाओं की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें दी जा रही मुआवजा राशि वर्तमान बाजार मूल्य के मुकाबले काफी कम है, जिससे उनके सामने भविष्य को लेकर चिंता खड़ी हो गई है।
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मुआवजा डीएलसी दर के अनुसार देने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि जमीन का मुआवजा डीएलसी दर के अनुसार उचित रूप से दिया जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से नुकसान में न रहें। इसके साथ ही उन्होंने एक्सप्रेस-वे बनने के बाद आवाजाही की समस्या को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि सड़क बनने के बाद खेतों और मकानों तक पहुंचने के पारंपरिक रास्ते बंद हो जाएंगे, इसलिए सर्विस रोड और अंडरपास की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित नहीं होगा।
एक्सप्रेस-वे एक महत्वाकांक्षी परियोजना
स्थानीय संघर्ष समिति के दिगंबर सिंह नहारवाल ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी जमीन लेकर उन्हें असुरक्षित स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि उचित मुआवजा और सुरक्षित रास्ते किसानों का अधिकार है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बता दें कि ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो अजमेर, जयपुर, टोंक, दौसा और सवाईमाधोपुर जिलों से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेस-वे ब्यावर के नेशनल हाईवे 58 से शुरू होकर कई प्रमुख कस्बों और शहरों को जोड़ते हुए भरतपुर में नेशनल हाईवे 21 तक पहुंचेगा।
14 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे
करीब 342 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर लगभग 14 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके लिए करीब 3175 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है और प्रक्रिया जारी है। सरकार का दावा है कि इस एक्सप्रेस-वे से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। टोंक सहित आसपास के जिलों का सीधा संपर्क बड़े औद्योगिक क्षेत्रों से होगा, जिससे व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और यातायात दबाव कम होने से दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है।