भिवाड़ी. चौपानकी 132 केवी जीएसएस की भार क्षमता पूरी हो चुकी है। नए विद्युत कनेक्शन देने और पुराने उपभोक्ताओं को भार वृद्धि करने के लिए क्षमता बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी। चौपानकी में अभी सौ मेगावाट की क्षमता है, जिस पर 94 मेगावाट का भार चल रहा है। जीएसएस पर बस पृथक्कीकरण होने के बाद के बाद 220 केवी जीएसएस बिलाहेड़ी और 220 केवी जीएसएस खुशखेड़ा से एक साथ बिजली आपूर्ति होती है। पहले सिर्फ एक तरफ से ही आपूर्ति होती है। अभी चौपानकी जीएसएस पर ट्रांसफार्मर की क्षमता 100 मेगावाट है और 132 केवी के दो फीडर है। उक्त जीएसएस की भार क्षमता पूरी होने की वजह से प्रसारण निगम क्षेत्र में 220 केवी और 132 केवी जीएसएस के लिए रीको से जगह की मांग कर रहा है। फिलहाल जीएसएस पर भार पूरा होने से छोटे कनेक्शन ही दिए जा सकते हैं। पांच एमवीए से अधिक का भार किसी कंपनी को नहीं दिया जा सकेगा।
उद्योगों को मिलेगी राहत
चौपानकी 132 केवी जीएसएस की क्षमता बढऩे से चौपानकी, पथरेड़ी, कहरानी उद्योग क्षेत्र की सैकड़ों इकाइयों को निर्बाध बिजली आपूर्ति हो सकेगी। एक तरफ जीएसएस की भार क्षमता बढ़ेगी दूसरी तरफ 220 केवी के दोनों स्टेशन से एक साथ बिजली आपूर्ति होने से कटौती की समस्या दूर होगी। क्षेत्र में कई बार बिजली भार बढऩे की वजह से फॉल्ट, ट्रिपिंग हो जाती है, जिसकी वजह से कई घंटे कटौती हो जाती है। उद्यमियों को परेशान होना पड़ता है।
नए कनेक्शन भी मिलेंगे
जीएसएस की भार क्षमता बढऩे के बाद क्षेत्र में नए कनेक्शन जारी करना भी आसान होगा। साथ ही पुराने उपभोक्ताओं का विद्युत भार बढ़ाया जा सकेगा। अभी तक जीएसएस पर अधिक भार होने की वजह से कई जगह विद्युत भार बढ़ाने से लेकर नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया लंबित ही रहेगी। जीएसएस की भार क्षमता बढऩे से बिजली की खपत भी बढ़ेगी, जिससे निगम को राजस्व भी अधिक मिलेगा।
प्रसारण निगम अधीक्षण अभियंता महीपाल यादव ने बताया कि सेक्शनाइजलर लगा दिए हैं, जीएसएस क्षमता 100 मेगावाट, जो लाइन बनी हुई है, उस पर सौ मेगावाट ही लोड डाला जा सकता है। दो तरफ से सोर्स है, एक भिवाड़ी एक खुशखेड़ा, पहले पूरी बस एक ही थी, या तो भिवाड़ी से लोड ले सकते थे या खुशखेड़ा। उस बस के दो टुकड़े कर दिए सेक्सनाइजर लगा दिए। ओवरलोडिंग की स्थिति में दोनों सिरे से 120 मेगावाट तक लोड ले जा सकते हैं। एक तरफ से 80 से 100 मेगावाट तक लोड चल सकता है, दूरी तरफ से 20 से 40 मेगावाट लोड चल सकता है। यह अस्थायी व्यवस्था रह सकती है।