श्रीगंगानगर: छोटा भाई जेल में, बड़े भाई ने बेच दिया घर; 20 लाख की संपत्ति का 7 लाख में सौदा

श्रीगंगानगर: राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहां दहेज उत्पीड़न के मामले में जेल में बंद एक व्यक्ति की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर उसके सगे बड़े भाई ने साथियों के साथ मिलकर उसका मकान बेच दिया। पीड़ित को इस जालसाजी की भनक जेल से पूरी तरह रिहा होने के बाद लगी। इसके बाद पीड़ित ने अदालत की शरण ली। अदालत के आदेश पर सदर थाना पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, चक 3 ई छोटी (गली नंबर 9) के निवासी अंग्रेज सिंह पुत्र सुरजीत सिंह ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ आवाज उठाई है। उसने अपने बड़े भाई हरभजन सिंह, रामलाल कॉलोनी निवासी सुशील कुमार और नागौरी कॉलोनी निवासी अमर सिंह के खिलाफ साजिश रचकर मकान हड़पने और बेचने का मुकदमा दर्ज कराया है।

आरोप है कि जब अंग्रेज सिंह दहेज के एक मामले में जेल में अपनी सजा काट रहा था, ठीक उसी दौरान उसके बड़े भाई ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची। आरोपियों ने पीड़ित की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उसके मालिकाना हक वाले मकान को औने-पौने दामों में बेच डाला।

सजा और जुर्माने के फेर में फंसा था पीड़ित

परिवादी अंग्रेज सिंह ने अपनी शिकायत में पूरी पृष्ठभूमि का उल्लेख किया है। उसने बताया कि दहेज उत्पीड़न के एक मामले में निचली अदालत ने उसे तीन वर्ष के साधारण कारावास और दो हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ अंग्रेज सिंह ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद उसकी मूल जेल की सजा को तो समाप्त कर दिया, लेकिन आर्थिक दंड को बढ़ाते हुए 50 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया। अदालत का सख्त आदेश था कि यदि जुर्माने की यह राशि दो महीने के भीतर जमा नहीं कराई गई, तो पीड़ित को दोबारा तीन वर्ष की कैद काटनी होगी।

20 लाख की संपत्ति मात्र 7 लाख में बेची

अंग्रेज सिंह ने बताया कि वह 7 अगस्त 2024 को पहली बार जेल से रिहा हुआ था। परंतु, आर्थिक तंगी के कारण वह कोर्ट द्वारा तय की गई 50 हजार रुपए की जुर्माना राशि समय पर जमा नहीं कर सका। नतीजा यह हुआ कि 15 अक्टूबर 2024 को उसे दोबारा जेल भेज दिया गया, जहां उसने लगभग 11 महीने की अतिरिक्त सजा काटी।

पीड़ित का आरोप है कि जब वह दोबारा जेल में बंद था, तब पीछे से उसके भाई हरभजन सिंह और अन्य आरोपियों ने उसके मकान का सौदा कर दिया। बाजार में उस मकान की वास्तविक कीमत करीब 20 लाख रुपए थी, लेकिन आरोपियों ने उसे मात्र 7 लाख रुपए में बेच दिया। धोखाधड़ी की पराकाष्ठा यह रही कि इस सौदे के बाद आरोपियों ने पीड़ित को केवल 2 लाख 63 हजार रुपए ही सौंपे और बाकी की मोटी रकम आपस में बांटकर डकार गए।

पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

जेल से अंतिम रूप से रिहा होने के बाद जब अंग्रेज सिंह को अपने आशियाने के बिकने और इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी मिली, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। अपनों से न्याय न मिलने पर उसने कोर्ट में इस्तगासा (परिवाद) दायर किया।
अदालत के निर्देश पर सदर थाना पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी गहन जांच एससी-एसटी सैल के सीओ विष्णु कुमार खत्री को सौंपी गई है।