Dholpur: पग-पग पर फैली अव्यवस्थाएं…बदरंग शहर की सूरत को कर रहीं और धूमिल

धौलपुर. धौलपुर…कहने को तो इस शहर को जिला की उपाधि मिली है। लेकिन व्यवस्थाओं के अभाव के कारण यह किसी पिछड़े कस्बे से कम नहीं लगता। जहां शहर की जर्जर सडक़ें, चौक चेम्बरों और नालों से होता जलभराव, बदहाल यातायात और अव्यवस्थित विद्युत व्यवस्था इसका आधार हैं। करोड़ों रुपए खर्च कर के भी जिम्मेदार शहर को इन अव्यवस्थाओं से मुक्ति नहीं दिला सके। हालांकि इन समस्याओं को दूर करने कार्य तो अमल में लाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इस असर दिखाई नहीं देता। जिसके कारण बाहर से शहर में आने वाले लोगों के साथ सैलानियों के सामने शहर की बदसूरत छवि प्रस्तुत होती है। यही कारण है कि शहर में आने वाले सैलानियों की भी संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

गंदगी कर रही शहर को और बदरंग

एतिहासिक नगरी धौलपुर में आना किसी सजा से कम नहीं है। जहां हर गली चौराहों पर लगे गंदगी के ढेर और बदबू मारती आवोहवा शहर की बदहाल तस्वीर को उजागर करने पर्याप्त है। नगर परिषद साफ-सफाई और कचरा उठान को लेकर कभी संजीदा दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि शहर में कई जगहों पर कचरे के ढेर लगे रहते हैं। शहर के गली चौराहों पर बना रखे कचरा प्वाइंट और इस अव्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं। परिषद ने सफाई को लेकर रात्रिकालीन सफाई अभियान भी चला रखा है, लेकिन वह भी कुछ कारगर साबित होता नहीं दिख रहा। सालों बाद और टेंडर प्रक्रिया, इन्वेस्ट करने के बाद भी अभी तक परिषद सागरपाड़ा स्थित डंपिंग यार्ड में कचरा निस्तारण इकाई को प्रारंभ तक नहीं कर सका है।

चौक चैम्बर और नाले बढ़ाएंगे सिरदर्द

शहर में समस्याओं की भरमार है। जिसका निराकरण करने में जिम्मेदार नाकाम साबित हो रहे हैं। यही कारण है कि पिछले तीन सालों से शहर में होने वाले जलभराव की समस्या को दूर नहीं किया जा सका। जिनका सबसे बड़ा कारण शहर की जलनिकासी, चौक चैम्बर और चौक नाले हैं। जलभराव के बाद परिषद ने गत वर्ष चौक चैम्बरों की सफाई के लिए ठेका भी दिया, लेकिन हालात जस के तस ही बने हैं। तो वहीं नाला सफाई को लेकर हर वर्ष ठेके दिए जाते हैं, इस सीजन भी शहर के 35 नालों की सफाई का ठेका दिया गया है, लेकिन संवेदक नाला सफाई के दौरान सिर्फ खानापूर्ति ही करता दिखाई दे रहा है। जिसकी कोई मॉनिटरिंग करने वाला तक नहीं होता। इस सबके बाद इस बार भी मानसून में जलभराव की समस्या से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।

बदहाली का आइना दिखा रहीं सडक़ें

शहर के गली मोहल्लों से लेकर मुख्य सडक़ें जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं। जिनपर आवागमन करना अपने आप को यातना देने के बराबर है। हालांकि पीडब्ल्यूडी ने गुलाब से लेकर स्टेशन तक सडक़ का निर्माण करा दिया है, लेकिन नगर परिषद के अधीन 27 सडक़ों के निर्माण का इंतजार अभी भी शहरवासियों को है। शहर की सडक़ों के हालात इस कदर खराब हैं कि गड्ढों के अलावा कुछ दिखता ही नहीं…मानो सडक़ गुम ही हो चुकी हो। जिनसे उड़ती धूल वातावरण को प्रदूषित कर दमा मरीजों की संख्या बढ़ा रहीं हैं तो शहर की बदसूरती में और चार चांद लगाने का काम कर रही हैं। हालांकि संवेदक ने गौरव पथ का निर्माण तो कराया, लेकिन वह भी आधा अधूरा ही पड़ा है। अब ऐसी स्थिति में शहर की सुंदर छवि बाहरी लोगों के मन में कैसे बैठेगी?

तारों का मकडज़ाल बढ़ा रहा परेशानियां

शहर में पुराने ढर्रे पर चली आ रही डिस्कॉम की बिजली व्यवस्था भी लोगों को कम दर्द देने का काम नहीं कर रही है, अपितु समस्याओं को और बढ़ा रही है। शहर में जगह-जगह झूलते बिजली के तार और एक खंभे से दर्जनों टंगी केबिलें किसी मकडज़ाल से जैसी प्रतीत होती हैं। सालों से झूलते इन तारों और बीच सडक़ों में खड़े खंभों को डिस्कॉम अभी तक दुरुस्त तक नहीं कर सका, जबकि मेंटेनेंस के नाम पर विभाग को प्रतिवर्ष राशि प्राप्त होती है। यही कारण है कि बार-बार ट्रिपिंग और फॉल्ट से भीषण गर्मी में शहरवासियों को परेशानियां उठानी पड़ती है।