बूंदी. 17 वीं शताब्दी में बनी नवलसागर झील दो सौ से अधिक घरों एवं होटलों से नालियों में निकलने वाले दूषित पानी से भर रही है। ऐसे में सुबह शाम झील पर व नवल सागर पार्क में घुमने आने वालों लोगों की संख्या प्रतिदिन कम होती जा रही है। शहर के लोगों ने कई बार नगर परिषद एवं जिला प्रशासन से इसकी शिकायत भी की , लेकिन किसी ने नालियों का पानी झील में जाने से रोकने की जहमत धरातल पर उठाई, जबकि झील में ऐतिहासिक नवलेश्वर महादेव का मंदिर भी है।
जानकारी अनुसार 17 वीं शताब्दी में बनी नवलसागर झील में कभी गढ़ पैलेस का प्रतिङ्क्षबब नजर आता था। सूर्यास्त के समय व रात की रोशनी में यह नजारा ओर भी भव्य लगता था। झील में वरुण देवता व नवलेश्वर महादेव का मंदिर है, जो हमेशा जलमग्न रहता है। झील में नालों से गिरती गन्दगी ने झील का स्वरूप ही बिगाड़ दिया है। आज वही झील गंदगी और कचरे से कराह रही है। गन्दगी की वजह से झील में से बदबू आ रही है जिससे पर्यटको में नाराजगी देखी जा रही है। प्रशासनिक अनदेखी के चलते झील कूड़ेदान में तब्दील हो गई है।
झील का बिगड़ा रहा स्वरूप
नवलसागर झील की वर्तमान हालत देखकर स्थानीय नागरिकों के साथ विदेशी पर्यटक भी विरासत की बेकद्री से निराश है। झील के पानी पर पॉलिथीन, प्लास्टिक बोतलें और पूजा सामग्री तैर रही है। किनारों पर कचरे के ढेर लगे हैं। झील में देवस्थान विभाग से लेकर बालचन्द पाडा के अधिकतर क्षेत्र का, पत्तल दुना स्कूल के ऊपर वाले भाग, सूरज जी का बड़ के पास की गलियां, भुत्या खाळ के ऊपर की गलियां, शुक्ल जी की गली, चौधरी मोहल्ला, नित्यानंद गली, खेड़ा देवी के पास का नाला, मुकुटेश्वर महादेव के पास से नवलसागर में नालों से गन्दगी आ रही है। वहीं इस क्षेत्र में करीब डेढ़ दर्जन पेइंग गेस्ट व होटल भी है, जिनका दूषित पानी भी झील में जाता है। नवल सागर में बरसाती नाले में भी बालचन्द पाडा के तीन नाले जुड़े है , जिसे बंद करने की अभी तक कोई योजना धरातल पर नहीं उतरी है। वहीं नगर परिषद व आरयूआईडीपी गंदे नाले बंद करने का दावा करती है।
पर्यटन पर भारी पड़ रही गन्दगी
विदेशी पर्यटकों के बड़े ग्रुप पहले नवलसागर ही आते थे। यहां से पैदल गढ़ पैलेस तक जाते थे। इस बीच नवलसागर सागर में गढ़ पैलेस का अक्स देखकर खूब फोटोग्राफी करते थे, लेकिन नालों से गिरती गन्दगी व झील से आती बदबू की बजह से नाक पर रुमाल रख कर निकल जाते है। अब पर्यटको ने यहां आना कम कर दिया है, जिससे पर्यटन पर भी मार पड़ी है।
नहीं हो रही सुनवाई
नगर परिषद और जिला प्रशासन से कई बार नालों को डायवर्ट कर सीवरेज से जोडऩे की मांग की जा चुकी है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। हर बार बूंदी महोत्सव के दौरान वादे किया जाते है, लेकिन पूरे नहीं होते। झील नालियों के पानी से भर रही है।
मनीष सिंह सिसोदिया, पार्षद
सभी का सहयोग मिले तो सुधरे धरोहर
नवलसागर झील ही नहीं बूंदी की धरोहर है, जिसे मूल स्वरूप में लाने के लिए प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। स्वच्छता अभियान से जुड़ी संस्थाओं, होटल व्यवसाय से जुड़े लोग टूरिस्ट गाइड व पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक साथ लाकर स्वच्छता अभियान चलाया जाए तो झील फिर से निखर सकती है।
नरेंद्र सिंह डोकुन, टूरिस्ट, गाइड