अब राजस्थान में भी होगी हवाई जहाजों की मरम्मत

देश में हवाई जहाजों की मरम्मत व रखरखाव के लिए आठ बड़े केंद्र संचालित हैं। अब नौंवी फैक्टरी कोटकासिम में खोलने की तैयारी चल रही है। यह एनसीआर की पहली फैक्टरी होगी, जिस पर दिल्ली, जेवर, जयपुर एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक के मेंटीनेंस से लेकर रिपेयर का भार आएगा। प्रदेश सरकार इसका प्रस्ताव तैयार कर रही है, जिसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैक्टरी के यहां खुलने से 8 से 10 हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा।

अलवर के कोटकासिम में वर्ष 2012-13 में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट मंजूर हुआ था। इसी के साथ एयरोसिटी भी बनाने की योजना थी। क्योंकि एनसीआर में कोई दूसरा एयरपोर्ट नहीं था। इसी को देखते हुए तैयारियां की गईं। करीब 110 एकड़ जमीन तलाश की गई, जिसमें कुछ भूमि उपजाऊ थी और कुछ बंजर थी। इसको लेकर कई बैठकें हुईं, लेकिन बाद में जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं दिया और इस एयरपोर्ट की जगह एनसीआर के नोएडा में जेवर एयरपोर्ट खुल गया। अब इसकी भरपाई के लिए कोशिशें चल रही हैं। क्योंकि जगह पूर्व में कोटकासिम में निर्धारित है। ऐसे में प्रशासन व सरकार को कोई खास तैयारी नहीं करनी होगी।

इस तरह लाया गया प्रस्ताव

केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव की ओर से यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। उन्होंने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के समक्ष यह प्रस्ताव रखा। कहा, एनसीआर में एयर ट्रैफिक की मरम्मत, रखरखाव आदि के लिए कोई केंद्र नहीं है। ऐसे में एनसीआर सीमा में ही इसे कोटकासिम में बनाया जा सकता है। हवाई जहाज यहां मरम्मत के लिए आएंगे, तो हवाई पट्टी बनेगी, जिससे जनता को भी लाभ मिलेगा। इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि वह केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे।

क्या है एमओआर

हवाई जहाज के मेंटेनेंस (मरम्मत और रखरखाव) करने वाली जगह या फैक्टरी को एमआरओ कहते हैं। यानि मेंटीनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल। इस फैक्टरी में विमानों की गहन जांच होती है। मरम्मत और पुर्जों को बदला जाता है। यहां एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरों से लेकर तकनीशियन, हेल्पर समेत कई पदों पर लोग काम करते हैं। देश में कई कंपनियों के एमआरओ हैं। अभी देश में हैदराबाद, मुंबई, नागपुर, बेंगलुरू, भुवनेश्वर आदि जगहों पर यह केंद्र चल रहे हैं।