Kota Maternal Deaths Case: कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल और जेके लोन अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी संक्रमण से चार प्रसूताओं की मौत हो चुकी है और दो की हालत गंभीर बनी हुई है। जबकि चार का इलाज चल रहा है।
हैरानी की बात यह है कि प्रसूताओं की मौत का पहला मामला सात दिन पहले आया था। लेकिन अभी तक मौत के कारणों का चिकित्सा प्रशासन ने खुलासा नहीं किया है, बल्कि कारणों पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। चार प्रसूताओं में से केवल एक का ही पोस्टमॉर्टम करवाया, उसकी रिपोर्ट को दबा रखा है।
उधर, जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम फिर कोटा पहुंची और यहां मरीजों की जानकारी ली। संक्रमण बढ़ने के कारण अब नए अस्पताल और जेके लोन में प्रसूताओं को भर्ती करना बंद कर दिया है। जहां प्रसूताएं भर्ती हैं, वहां पुलिस का पहरा लगा दिया है।
नए अस्पताल के आइसीयू में भर्ती 6 प्रसूताओं में से 2 की हालत गंभीर और 2 की स्थिर बनी हुई है। वहीं, दो अन्य प्रसूताओं को सोमवार को स्थिति में सुधार होने पर आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
3 दिन की बेटी को लेकर धरने पर बैठे, शव लेने से इनकार
रविवार देर रात जेके लोन अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में शिफ्ट की गई प्रसूता पिंकी महावर की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने मौत के कारणों की जांच, इलाज में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शव लेने से इनकार कर दिया।
परिजन अस्पताल में विलाप करते रहे। सूचना पर मध्य रात्रि ही बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और मृतका के परिजनों के साथ 3 दिन की बेटी को लेकर धरने पर बैठ गए, जो सोमवार शाम तक जारी रहा।
पांच प्रसूताओं का यूरिन आउटपुट नहीं
सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत में लगातार उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। भर्ती प्रसूताएं धन्नी बाई, रागिनी, आरती, पिंकी वर्मा, सुशीला को कई दिन से यूरिन आउटपुट नहीं हुआ है। सिर्फ प्रसूता चंद्रकला का ही यूरिन आउटपुट हुआ है।
वहीं, आरती का सोमवार को डायलिसिस किया गया और धन्नी बाई का अब तक तीन बार डायलिसिस हो चुका है। हालांकि, उसे ऑक्सीजन माक्स लगा हुआ है। इसी तरह इटावा क्षेत्र की रागिनी की तबीयत में आंशिक सुधार है। ब्लीडिंग होने के बाद रविवार को दूसरी डायलिसिस की गई है।
प्रसूताओं के लक्षण अलग-अलग
प्राचार्य डॉ. निलेश जैन ने कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं और जेके लोन से आई प्रसूताओं के लक्षण अलग-अलग हैं। इसलिए दोनों को एक साथ जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
पिंकी महावर से पहले दो और प्रसूताओं आरती और पिंकी वर्मा को जेके लोन से एसएसबी में शिफ्ट किया था। आरती में किडनी फेल्योर के लक्षण हैं, उसकी स्थिति गंभीर है। पिंकी वर्मा को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की वजह से शिफ्ट किया गया है, वह भी सीरियस है।
जांच की स्थिति
दवा के सैम्पल लिए, लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली।
गायनिकी वार्ड में संक्रमण की कल्चर रिपोर्ट में घालमेल।
एक प्रसूता का पोस्टमॉर्टम हुआ था, लेकिन रिपोर्ट दबा दी।
मृतका की बच्चेदानी लेकर घूमते रहे परिजन
जेके लोन अस्पताल में ऑपरेशन कर पिंकी महावर की बच्चेदानी निकाली गई थी। इसके बाद उसकी तबीयत नहीं सुधारी और बाद में उसकी मौत हो गई। जेके लोन के चिकित्सकों ने बच्चेदानी की मेडिकल कॉलेज में जांच करवाने के लिए परिजनों को सौंप दी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी बच्चेदानी को जांच के लिए नहीं लिया। ऐसे में परिजन सोमवार को पूरे दिन मृतका की बच्चेदानी को लेकर घूमते रहे।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी कर मांगी रिपोर्ट
राज्य मानवाधिकार आयोग ने प्रसूताओं की मौत और चिकित्सा लापरवाही के मामलों पर गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने इसे स्वास्थ्य के अधिकार का हनन मानते हुए मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग अध्यक्ष जीआर मूलचंदानी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि राजस्थान और जयपुर हेल्थ टूरिज्म के केंद्र के रूप में उभर रहा है। ऐसे में सर्जरी में लापरवाही चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। आयोग ने हर जिले में पर्याप्त कुशल चिकित्सकों की नियुक्ति और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।