पश्चिम बंगाल में ‘राजस्थानी’ का डंका ! अशोक कीर्तनिया को मिला सुवेंदु सरकार में कैबिनेट मंत्री का ज़िम्मा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार, 9 मई के दिन एक नया इतिहास लिखा गया है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य समारोह में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राज्यपाल आर. एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। लेकिन इस पूरे समारोह में राजस्थान के लोगों की नजरें एक खास चेहरे पर टिकी थीं। वो चेहरा है अशोक कीर्तनिया का, जिन्हें सुवेंदु सरकार में महत्वपूर्ण ‘कैबिनेट मंत्री’ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अशोक कीर्तनिया: राजस्थान से क्या है गहरा नाता?

अशोक कीर्तनिया भले ही आज बंगाल की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं, लेकिन उनकी जड़ें राजस्थान की वीर प्रसूता माटी से जुड़ी हैं।

प्रवासी विरासत: अशोक उन प्रवासी राजस्थानियों के परिवार से आते हैं जो दशकों पहले व्यापार और रोजगार के सिलसिले में मरुधरा से निकलकर बंगाल की खाड़ी के किनारे बसे थे।

सांस्कृतिक जुड़ाव: राजनीतिक रूप से बंगाल में सक्रिय रहने के बावजूद, अशोक कीर्तनिया का अपने मूल प्रदेश राजस्थान से गहरा सांस्कृतिक और सामाजिक लगाव आज भी बरकरार है। वे उन 5 विजयी प्रवासी राजस्थानी उम्मीदवारों में शामिल हैं जिन्होंने भाजपा के टिकट पर बंगाल विधानसभा में परचम लहराया है।

Congratulations to Dilip Ghosh Ji, Agnimitra Paul Ji, Ashok Kirtania Ji, Kshudiram Tudu Ji and Nisith Pramanik Ji on taking oath as Ministers in the Government of West Bengal. These leaders have worked tirelessly at the grassroots and served people. I am confident they will… pic.twitter.com/3E4XcXWoav

— Narendra Modi (@narendramodi) May 9, 2026

बनगांव उत्तर से लगातार जीत

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने बनगांव उत्तर से लगातार दो बार विधायक रह चुके अशोक कीर्तनिया को मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई #OathCeremony #WestBengal #SuvenduAdhikari #Kolkata #WestBengal #BrigadeParadeGround pic.twitter.com/70CvpU7zHB

— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) May 9, 2026

अशोक कीर्तनिया की राजनीतिक यात्रा उनकी कड़ी मेहनत और जमीनी पकड़ का नतीजा है।

लगातार दूसरी जीत: उन्होंने पहली बार 2021 में बनगांव उत्तर (SC) सीट से जीत दर्ज की थी। 2026 के इस ऐतिहासिक चुनाव में उन्होंने न केवल अपनी सीट बचाई, बल्कि 40,670 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल कर अपनी लोकप्रियता साबित कर दी।

मतुआ समुदाय के ‘मसीहा’: अशोक कीर्तनिया बंगाल के प्रभावशाली दलित नेताओं में शुमार हैं। सीमावर्ती इलाकों और विशेष रूप से मतुआ समुदाय के बीच उनकी जबरदस्त पैठ है। भाजपा की इस बड़ी जीत में मतुआ वोट बैंक को एकजुट करने में उनका सबसे बड़ा हाथ माना जाता है।

व्यवसायी से कैबिनेट मंत्री तक का सफर

लगभग 52 वर्षीय अशोक कीर्तनिया एक सधे हुए राजनेता होने के साथ-साथ एक सफल व्यवसायी भी हैं।

शैक्षणिक योग्यता: उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीनबंधु महाविद्यालय से स्नातक (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है।

संगठनात्मक कौशल: उनकी व्यवसायी पृष्ठभूमि ने उन्हें प्रबंधन और लोगों से जुड़ने की कला सिखाई, जिसका लाभ भाजपा को संगठन विस्तार में मिला।

राजस्थान की रणनीति, भाजपा का ‘मास्टरस्ट्रोक’!

पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत 9 ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था जिनका संबंध राजस्थान से था। इन 9 में से 5 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जो यह दर्शाता है कि प्रवासी राजस्थानी समुदाय अब बंगाल की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गया है।

राजस्थान से जुड़े ये 5 प्रत्याशी जीते

राजस्थान से जुड़े ये 5 प्रत्याशी जीते

1- विजय ओझा, जोड़ासांको – 5797
2- भरत कुमार झंवर, बेलडांगा – 13208
3- अजय कुमार पोद्दार, कुल्टी – 26498
4- राजेश कुमार, जगद्दल – 20909
5- अशोक कीर्तनिया, बनगांव उत्तर – 40670।