Ranthambore: 23 दिन से रणथंभौर में घूम रहे चीते को ट्रेंकुलाइज कर वापस कूनो भेजा, 43 दिन में दूसरी बार रेस्क्यू

सवाईमाधोपुर। कूनो नेशनल पार्क से निकलकर पिछले 23 दिन से रणथंभौर टाइगर रिजर्व में डेरा डाले चीता केएपी-2 (नया नाम केएपी-12) को ट्रेंकुलाइज कर वापस कूनो भेज दिया गया है। रणथंभौर टीम की मदद से कूनो के विशेषज्ञों और चिकित्सकों की टीम ने शुक्रवार की सुबह फलौदी रेंज के काला कुआं क्षेत्र चीते को रेस्क्यू किया। चीते को लेकर कूनो की टीम सुबह साढ़े 9 बजे रणथंभौर से रवाना हुई और सुबह साढ़े 11 बजे के करीब चीते को वापस कूनो के खुले जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

गौरतलब है कि चीता केएपी-2 गत अप्रेल माह में कूनो से निकलकर कोटा जिले के इटावा क्षेत्र में पहुंचा और फिर वहां से निकलकर सवाईमाधोपुर जिले की सीमा में रणथंभौर टाइगर रिजर्व में पहुंच गया। पिछले 23 दिन से ये फलौदी रैंज के जंगल व आबादी क्षेत्र में ही डेरा डाले हुए था।

हालांकि कूनो की ट्रैकिंग टीम और रणथंभौर की स्थानीय टीम निगरानी में जुटी थी, लेकिन कूनो प्रबंधन ने चीते को वापस लाने का निर्णय लिया। यही वजह है कि शुक्रवार की अल सुबह से ही चीता प्रोजेक्ट के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा के नेतृत्व में डीएफओ कूनो आर थिरुकुराल के साथ रेस्क्यू टीम चीते की लोकेशन पर पहुंची और लगभग डेढ़ घंटे में ट्रैंक्युलाइज कर वापस ले आए। इस दौरान रणथम्भौर के डीएफओ मानस सिंह, फलौदी रेंजर विजय मीणा, उडनदस्ता रेंजर तुलसीराम मीणा आदि मौजूद थे।

केएपी-2 का 43 दिन में दूसरी बार रेस्क्यू

चीता केएपी-2 को राजस्थान के रेस्क्यू कर पहली बार नहीं ले जाया गया है, बल्कि 43 दिन में ये दूसरी बार मौका है, जब उसे रेस्क्यू कर वापस कूनो ले जाया गया है। इससे पहले 27 मार्च 2026 को चीता केएपी-2 को कोटा जिले की सीमा के ईटावा क्षेत्र के निमोदा उजाड़ गांव के पास से ट्रेंकुलाइज किया और बॉक्स में सुरक्षित वापस ले जाया गया।

इसके बाद कूनो के खुले जंगल में ही फिर से छोड़ दिया गया। लेकिन वापस आने के कुछ दिन बाद ही केएपी-2 ने फिर रणथम्भौर का रुख कर लिया और अप्रेल के तीसरे सप्ताह में फिर ये सवाईमाधोपुर आ गया था।

इनका कहना है

चीते केएपी-12 को रेस्क्यू कर वापस लाया गया है। पिछले कुछ दिनों में यह मानव-बाहुल्य क्षेत्र में चला गया था। चीते और स्थानीय आबादी दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेस्क्यू करने का निर्णय लिया गया। इसमें रणथम्भौर के वन विभाग का पूरा समर्थन मिला है।
-उत्तम कुमार शर्मा, डायरेक्टर, चीता प्रोजेक्ट, कूनो नेशनल पार्क।

मध्य प्रदेश की कूनो टीम की ओर से फलौदी रेंज स्थित काला कुआं क्षेत्र से चीते को ट्रेंकुलाइज कर पुन: मध्य प्रदेश ले जाया गया है। पूरी कार्रवाई वन विभाग के अधिकारियों एवं विशेषज्ञ टीम की उपस्थिति में सुरक्षित एवं निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार की गई। चीते की सतत मॉनिटरिंग की जा रही थी तथा उसकी गतिविधियों पर वन विभाग लगातार नजर रखे हुए था। ट्रेंकुलाइजेशन की प्रक्रिया अनुभवी चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की देखरेख में की गई।
-मानस सिंह, डीएफओ रणथम्भौर।