टेक्सटाइल सिटी की सड़कों पर बजरी माफिया का खौफनाक तांडव जारी है। आलम यह कि शहर की मुख्य सड़कों से लेकर रिहायशी इलाकों की गलियों तक अलसुबह अवैध बजरी से भरे डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली यमराज बनकर दौड़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि भीलवाड़ा और कोटड़ी तहसील में बनास नदी में बजरी की एक भी लीज नहीं है, फिर भी शहर में रोजाना हजारों टन अवैध बजरी खपाई जा रही है। यह पूरा खेल पुलिस, प्रशासन और खनिज विभाग की नाक के नीचे चल रहा है।
एसीएस की फटकार का भी असर नहीं
हाल ही में खान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव अर्पणा अरोड़ा ने अवैध खनन को लेकर जिला प्रशासन को फटकार लगाई थी। इसके बाद कलक्टर ने 4 मई को भीलवाड़ा, कोटड़ी, जहाजपुर और मांडलगढ़ में विशेष अभियान के लिए संयुक्त टीम का गठन किया। लेकिन धरातल पर खनिज विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। अवैध परिवहन में लगे ये वाहन पकड़े जाने के डर से इतनी तेज गति से चलते हैं कि आए दिन राहगीर इनकी चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं। माफिया विशेष रूप से डंपर और ट्रैक्टरों को चलाने के लिए ऐसे युवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं जो बेखौफ होकर सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाते हैं।
सांसद ने जताई गहरी चिंता: माफिया हो गए नरभक्षी
सांसद दामोदर अग्रवाल ने इस मुद्दे पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सांसद का दर्द और गुस्सा साफ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि बजरी माफिया बेखौफ और नरभक्षी हो गए हैं। परिवारों की मौत पर उन्हें क्या जवाब दें, यह समझ नहीं आता। अग्रवाल ने कलक्टर से स्पष्ट कहा है कि इस तरह कैसे चलेगा। खनिज विभाग की लापरवाही से अवैध खनन हो रहा है। पहले नदी में रेत दिखती थी, अब माफिया रेत को रसातल तक खोद चुके हैं।
सिस्टम पर खड़े सवाल
कलक्टर ने 4 मई को आदेश निकाला, लेकिन खनिज विभाग और प्रशासन उसकी पालना नहीं कर रहा। भीलवाड़ा में केवल चार लीज चल रही हैं, बाकी सब अवैध है। यह लीज फूलियाकलां, आसींद, रायपुर व सहाड़ा में ही है। पकड़े जाने वाले अधिकांश ट्रैक्टरों को छोड़ दिया जाता है। पकड़े गए वाहनों में ज्यादातर ट्रैक्टर होते हैं जबकि बड़े डंपर माफिया के रसूख के चलते खुलेआम निकल जाते हैं। पत्रिका टीम की पड़ताल में सामने आया कि माफिया ने अपने परिवहन का समय सुबह 5 से 8 बजे के बीच तय कर रखा है।