सर्वे पूरा, साहबी नदी फिर होगी पुनर्जीवित, मेजर चैन से जुड़ेगे प्रमुख नाले

राठ क्षेत्र (मुंडावर, बहरोड़ और बानसूर) की जीवनरेखा मानी जाने वाली साहबी नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। बरसों से सूखी पड़ी इस नदी का सर्वे पूरा हो चुका है। इस सर्वे रिपोर्ट व विभिन्न विभागों के सुझावों के आधार पर फाइनल डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जा रही है। इस डीपीआर का निर्माण नैपकॉन कंपनी कर रही है। सर्वे में सामने आया कि नदी से जुड़े 300 से अधिक छोटे-बड़े नालों का अस्तित्व समाप्त होने से नदी का प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हुआ और धीरे-धीरे यह सूखती चली गई।
मेजर चैन विकसित की जाएगी
योजना के तहत एक मेजर चैन विकसित की जाएगी, जिसके माध्यम से सोतानाला, नारायणपुर नाला सहित अन्य प्रमुख नालों को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे जल का प्रवाह तेज होगा। वन विभाग नदी किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण करेगा, जिससे हरित क्षेत्र बढ़ेगा और मिट्टी का कटाव रुकेगा। वाटरशेड विभाग वर्षा जल को संरक्षित करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करेगा। लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाया जाएगा।
अंतरर्राज्यीय महत्व की नदी
साहबी नदी का उद्गम सीकर-जयपुर की पहाड़ियों से होता है। यह अलवर के राठ क्षेत्र से होकर हरियाणा में नजफगढ़ नाले के जरिए दिल्ली तक पहुंचती है और अंत में यमुना नदी में मिल जाती है। करीब 157 किलोमीटर लंबी यह नदी क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरर्राज्यीय जल संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है।
गहराई में खिसका जलस्तर, इसलिए नहीं दिखता बहाव
नदी के बहाव क्षेत्र में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। यही वजह है कि सतह पर पानी का प्रवाह नहीं दिखता। यदि नालों को फिर से जोड़ा गया और भूजल रिचार्ज बढ़ाया गया, तो नदी का प्राकृतिक प्रवाह फिर शुरू हो सकता है। इससे आसपास के क्षेत्रों में पानी की समस्याो भी निजात मिलेगी।