Crime News: जयपुर के महेश नगर पुलिस ने एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो नाबालिग बच्चों को ‘प्रोफेशनल सैलरी’ पर रखकर उनसे मोबाइल चोरी करवाता था। झारखंड की कुख्यात ‘मीना बाजार गैंग’ के इस नेटवर्क ने पुलिस को भी चौंका दिया है। गैंग का सबसे छोटा 12 साल का सदस्य 20 हजार रुपए महीने के वेतन पर भीड़ में हाथ साफ करता था, जबकि उसके रहने और खाने का पूरा खर्च गैंग का सरगना उठाता था।
डीसीपी (साउथ) राजर्षि राज के अनुसार, महेश नगर 80 फीट रोड पर हटवाड़ा बाजार में एक ही दिन में कई मोबाइल चोरी किए थे। मामले में झारखंड निवासी दिलवर मंडल को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इसके दो नाबालिग साथियों को बाल सुधार गृह भेजा गया। 300 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की मदद और ग्राउंड इंटेलिजेंस के बाद पुलिस महेश नगर पुलिस ने इस ‘सैलरी वाली गैंग’ का भंडाफोड़ किया।
कॉरपोरेट स्टाइल में स्ट्रक्चर
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गैंग किसी बड़ी कंपनी की तरह काम करता है। इसमें तीन स्तर के कर्मचारी होते हैं।
कामदार (नाबालिग): 10 से 15 साल का बच्चा, जिसका काम भीड़ में मोबाइल पार करना है। वेतन- 20 हजार रुपए।
सप्लायर: यह नाबालिग पर नजर रखता है और चोरी होते ही मोबाइल लेकर गायब हो जाता है। वेतन- 15 हजार रुपए।
सरगना: यह पूरी टीम को मॉनिटर करता है और खतरे की स्थिति में सचेत करता है।
भीड़भाड़ में चोरी
यह गैंग खास तौर पर उन जगहों को निशाना बनाता है जहां लोगों का ध्यान बंटा रहता है, जैसे भागवत कथा, आइपीएल मैच, हटवाड़ा बाजार और धार्मिक उत्सव। पुलिस ने साहिबगंज (झारखंड) निवासी दिलवर मंडल को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 7 मोबाइल बरामद किए हैं। आरोपी झालाना कच्ची बस्ती में किराए का कमरा लेकर अपनी ‘टीम’ को ऑपरेट कर रहा था।
ऐसे करते वारदात
फ्री पैकेज: वेतन के अलावा बच्चों को रहना, खाना और मनोरंजन मुफ्त दिया जाता है ।
टारगेट: एक महीने में यह टीम 15 से ज्यादा वारदातों को अंजाम दे चुकी है।
रूट: गैंग सीधे झारखंड से ट्रेन के जरिये जयपुर आती है और कई वारदात करने के बाद मोबाइल लेकर लौट जाती है।