Jaipur Security Breach: लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी उमर हारिस उर्फ खरगोश के मामले में हो रहे बड़े खुलासों ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। आतंकी खगोश ने राजधानी जयपुर के सुरक्षा घेरे में बड़ी सेंध लगा दी। यह आतंकी करीब एक साल तक शहर में ‘सज्जाद अहमद’ की फर्जी पहचान के साथ न केवल रहा, बल्कि स्थानीय नागरिक होने के तमाम दस्तावेज भी तैयार करवा लिए।
उसने पिता का नाम मोहम्मद अब्दुल्ला और अपना पता- 13, राशिद विहार, सड़वा, जयसिंहपुरा खोर दर्शाया। चौंकाने वाली बात यह है कि वह हवामहल विधानसभा क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता तक बन गया।
एक के बाद एक बनवाता गया दस्तावेज
उमर हारिस ने जयसिंहपुरा खोर के ‘राशिद विहार’ के पते पर आधार कार्ड, वोटर आइडी, पैन कार्ड और बैंक खाता हासिल कर लिया। वह खुद को हरियाणा के नूंह का निवासी बताता था, लेकिन जयपुर की एजेंसियों ने यह जांचना जरूरी नहीं समझा कि एक बाहरी व्यक्ति यहां के स्थानीय पते पर इतनी आसानी से आइडी कैसे बनवा रहा है।
पासपोर्ट की चाहत ने फंसाया
आतंकी की पहचान तब उजागर हुई जब उसने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। पुलिस सत्यापन के दौरान जब कड़ियां नूंह (हरियाणा) से जुड़ीं, तो जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए। पता चला कि नूंह और जयपुर, दोनों ही जगहों पर मकान मालिकों ने उसका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया था, जिसका फायदा उठाकर वह लंबे समय तक सिस्टम की नजरों से ओझल रहा। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि फाइल वास्तव में नूंह भेजी गई थी या नहीं और वहां उसने किस नाम से दस्तावेज तैयार कराए थे।
रडार पर बैंक खाते और रेकी का शक
सुरक्षा एजेंसियां अब सज्जाद के नाम से खुले बैंक खाते के लेन-देन को खंगाल रही हैं। आशंका है कि जयपुर में प्रवास के दौरान वह मंदिरों, मॉल और भीड़भाड़ वाले बाजारों की रेकी कर रहा था। जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय एजेंसियां और राजस्थान पुलिस मामले की जांच कर रही है।
एजेंसियों के सामने बड़े सवाल
मददगार कौन: फर्जी किरायानामा और सरकारी दस्तावेज बनवाने में किन स्थानीय लोगों ने उसकी मदद की?
फंडिंग का स्रोत: बैंक खाते में पैसा कहां से आ रहा था और किन खातों में भेजा गया?
नेटवर्क: क्या जयपुर में उसके अन्य साथी भी सक्रिय हैं?