अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और यातायात को सुगम बनाने के लिए प्रस्तावित एलिवेटेड रोड का प्रोजेक्ट अब रफ्तार पकड़ने वाला है। पिछले चार साल से यह प्रोजेक्ट कागजी उलझनों और भारी-भरकम बजट के कारण अटका हुआ था। अब सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी एनएच) ने इसके लिए नई कंसल्टेंट एजेंसी फाइनल कर दी है, जो जल्द ही अपनी सर्वे रिपोर्ट और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पर काम शुरू करेगी।
पिछली गलतियों से लिया सबक, अब बचेगा पैसा
आपको बता दें कि करीब दो साल पहले भी इस प्रोजेक्ट के लिए एक डीपीआर बनाई गई थी, लेकिन वह तकनीकी और आर्थिक रूप से अव्यावहारिक साबित हुई। पुरानी रिपोर्ट में प्रोजेक्ट की लागत 2 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक पहुंच गई थी। इतनी बड़ी राशि और कई तकनीकी खामियों की वजह से केंद्र सरकार ने उस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।
अब नए सिरे से रूट पर मंथन करने के बाद पीडब्ल्यूडी ने टेंडर जारी किए थे। नई योजना के तहत कोशिश यह है कि विदेशी तकनीक का सहारा लेकर लागत को कम किया जाए। अनुमान लगाया जा रहा है कि नई डीपीआर में इस रोड की लागत पुरानी वाली से लगभग 1 हजार करोड़ रुपये कम हो जाएगी। यानी अब यह प्रोजेक्ट करीब 1 हजार करोड़ रुपये के आसपास ही बनकर तैयार हो सकता है।
वन्यजीवों की सुरक्षा प्राथमिकता
सरिस्का एक संवेदनशील इलाका है, जहां बाघों और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही रहती है। एलिवेटेड रोड का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि गाड़ियों का शोर और लाइट वन्यजीवों को परेशान न करें। नई कंसल्टेंट एजेंसी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के मानकों का पूरा ध्यान रखें।
6 महीने का है टारगेट
चयनित एजेंसी को 6 महीने के भीतर अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इसमें मिट्टी की जांच, रूट मैप और पुल की मजबूती जैसे तकनीकी पहलू शामिल होंगे। जैसे ही यह डीपीआर तैयार होकर केंद्र सरकार से पास हो जाएगी, इस महत्वपूर्ण रोड का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा, जो न केवल अलवर बल्कि जयपुर और दिल्ली के बीच यात्रा करने वालों के लिए भी बड़ी राहत साबित होगा।